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झारखंड में शमशुद्दीन को पीटकर मौत के घाट उतारने का मामला...
Updated Thu, 26 Apr 2018 12:28 AM IST
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बोकारो कोर्ट के फैसले का जमीयत ने किया स्वागत
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने शमशुद्दीन अंसारी की पीट पीटकर हत्या करने के मामले में सभी दस आरोपियों को तेनुघाट बोकारो कोर्ट झारखंड द्वारा उम्र कैद की सजा देने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश में जारी नफरत के माहौल में आशा की एक किरण करार दिया है।
धनबाद निवासी शमशुद्दीन अंसारी 2017 के अप्रैल माह में जिला बोकारो में अपने एक रिश्तेदार के यहां गया था, जहां कुछ लोगों ने बच्चा चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट की थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले आए फैसले पर बुधवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भीड़ हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। इनमें जिला अधिकारियों और राज्य सरकार के कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों का व्यवहार नफरत फैलाने वालों के अनुरूप था। देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तत्व संगठित होकर अल्पसंख्यकों विशेषकर दलितों और मुसलमानों को किसी न किसी बहाने निशाना बना रहे हैं। ऐसा महसूस होता है कि इनको देश के कानून की गिरफ्त का कोई डर नहीं है। पिछले महीने रामगढ़ अदालत और अब बोकारो अदालत के फैसलों से सांप्रदायिक ताकतों के हौसले पस्त होंगे।
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने शमशुद्दीन अंसारी की पीट पीटकर हत्या करने के मामले में सभी दस आरोपियों को तेनुघाट बोकारो कोर्ट झारखंड द्वारा उम्र कैद की सजा देने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे देश में जारी नफरत के माहौल में आशा की एक किरण करार दिया है।
धनबाद निवासी शमशुद्दीन अंसारी 2017 के अप्रैल माह में जिला बोकारो में अपने एक रिश्तेदार के यहां गया था, जहां कुछ लोगों ने बच्चा चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट की थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले आए फैसले पर बुधवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि झारखंड में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भीड़ हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं। इनमें जिला अधिकारियों और राज्य सरकार के कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों का व्यवहार नफरत फैलाने वालों के अनुरूप था। देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तत्व संगठित होकर अल्पसंख्यकों विशेषकर दलितों और मुसलमानों को किसी न किसी बहाने निशाना बना रहे हैं। ऐसा महसूस होता है कि इनको देश के कानून की गिरफ्त का कोई डर नहीं है। पिछले महीने रामगढ़ अदालत और अब बोकारो अदालत के फैसलों से सांप्रदायिक ताकतों के हौसले पस्त होंगे।
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