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मंडल की चीनी मिलों में बढ़ी औसत शुगर रिकवरी
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:43 PM IST
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सहारनपुर। गन्ना विभाग की ओर से चलाए गए प्रजाति बदलाव अभियान का असर दिखना शुरू हो गया है। गन्ने की प्रजाति बदलने से मंडल में शुगर रिकवरी में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। गत वर्ष जहां शुगर की औसत रिकवरी 9.84 प्रतिशत थी, वहीं इस बार रिकवरी का प्रतिशत 9.96 फीसदी हो गया है।
पिछले दो वर्षों से गन्ना विभाग गन्ना बीज प्रजाति बदलाव के लिए अभियान चला रहा है। इसके तहत सबसे पहले किसानों को रिजक्ट वैराइटी नहीं बोने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कृषकों को गन्ने की अगेती प्रजाति की बुवाई के लिए प्रोत्साहित किया। इसका नतीजा यह रहा कि क्षेत्र में रिजेक्ट वैराइटी लगभग समाप्त हो गई और गन्ने की अर्ली वैराइटी के रकबे में खासी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा किसानों ने बडे़ स्तर पर गन्ना बुवाई की ट्रेंच विधि को भी अपनाया। प्रजाति बदलाव और मौसम की अनुकूलता के कारणा इस बार जहां गन्ना की औसत पैदावार में वृद्धि हुई है, वहीं चीनी की रिकवरी भी 0.12 प्रतिशत बढ़ गई है।
मंडल की चीनी मिलों ने गत वर्ष इस अवधि में 248 लाख क्विंटल गन्ना पेराई करके 22.68 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था। वहीं, इस बार अब तक 323 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 32.19 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हो चुका है। उप गन्ना आयुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि किसान अब अगेती प्रजातियों की बुवाई कर रहे हैं। इसके अलावा मौसम की अनुकूलता का भी शुगर रिकवरी बढ़ाने में खासा योगदान है। उन्होंने बताया कि जिन शुगर मिलों का क्रय केंद्रों से गन्ना उठान प्रबंधन अच्छा है उनकी यहां रिकवरी दूसरी मिलों की उपेक्षा बेहतर है। विभाग का प्रयास है कि मंडल में अगेती प्रजातियों और सामान्य प्रजातियों का क्षेत्रफल 50-50 प्रतिशत होना चाहिए।
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पिछले दो वर्षों से गन्ना विभाग गन्ना बीज प्रजाति बदलाव के लिए अभियान चला रहा है। इसके तहत सबसे पहले किसानों को रिजक्ट वैराइटी नहीं बोने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कृषकों को गन्ने की अगेती प्रजाति की बुवाई के लिए प्रोत्साहित किया। इसका नतीजा यह रहा कि क्षेत्र में रिजेक्ट वैराइटी लगभग समाप्त हो गई और गन्ने की अर्ली वैराइटी के रकबे में खासी बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा किसानों ने बडे़ स्तर पर गन्ना बुवाई की ट्रेंच विधि को भी अपनाया। प्रजाति बदलाव और मौसम की अनुकूलता के कारणा इस बार जहां गन्ना की औसत पैदावार में वृद्धि हुई है, वहीं चीनी की रिकवरी भी 0.12 प्रतिशत बढ़ गई है।
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मंडल की चीनी मिलों ने गत वर्ष इस अवधि में 248 लाख क्विंटल गन्ना पेराई करके 22.68 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था। वहीं, इस बार अब तक 323 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर 32.19 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हो चुका है। उप गन्ना आयुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि किसान अब अगेती प्रजातियों की बुवाई कर रहे हैं। इसके अलावा मौसम की अनुकूलता का भी शुगर रिकवरी बढ़ाने में खासा योगदान है। उन्होंने बताया कि जिन शुगर मिलों का क्रय केंद्रों से गन्ना उठान प्रबंधन अच्छा है उनकी यहां रिकवरी दूसरी मिलों की उपेक्षा बेहतर है। विभाग का प्रयास है कि मंडल में अगेती प्रजातियों और सामान्य प्रजातियों का क्षेत्रफल 50-50 प्रतिशत होना चाहिए।
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