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नल्हेड़ा गुर्जर में मनाया गया मानवाधिकार दिवस
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:42 PM IST
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सहारनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से रविवार को ग्राम नल्हेड़ा गुर्जर में मानव अधिकार दिवस का आयोजन किया गया। इसमें मानवाधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में प्राधिकरण सचिव सुनील कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बोलने, न्याय पाने, वोट डालने, समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सती प्रथा, बाल विवाह, मानव तस्करी और धार्मिक हिंसा मानवाधिकार हनन में आते हैं। इनके उल्लंघन को रोकने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सक्रिय है। उन्होंने कहा कि मुल्जिम के क्या अधिकार हैं, इसके बारे में भी प्रत्येक थाने में बोर्ड पर सूचना लिखवाई गईं हैं। तहसीलदार सदर सुधीर कुमार ने कहा कि मानव अपने अधिकारों की बात तो करता है लेकिन उसे अपने कर्तव्यों के पालन पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। सुमित पंवार एडवोकेट ने प्रथम सूचना रिपोर्ट, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और स्थाई लोक अदालतों के बारे में बताया। अर्पित शर्मा एडवोकेट, ग्राम प्रधान विरेंद्र सिंह, आदि ने भी विचार रखे। संचालन राजकुमार गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अलावा कानूनगो, लेखपाल आदि मौजूद रहे।
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रविवार को आयोजित कार्यक्रम में प्राधिकरण सचिव सुनील कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बोलने, न्याय पाने, वोट डालने, समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सती प्रथा, बाल विवाह, मानव तस्करी और धार्मिक हिंसा मानवाधिकार हनन में आते हैं। इनके उल्लंघन को रोकने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सक्रिय है। उन्होंने कहा कि मुल्जिम के क्या अधिकार हैं, इसके बारे में भी प्रत्येक थाने में बोर्ड पर सूचना लिखवाई गईं हैं। तहसीलदार सदर सुधीर कुमार ने कहा कि मानव अपने अधिकारों की बात तो करता है लेकिन उसे अपने कर्तव्यों के पालन पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। सुमित पंवार एडवोकेट ने प्रथम सूचना रिपोर्ट, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और स्थाई लोक अदालतों के बारे में बताया। अर्पित शर्मा एडवोकेट, ग्राम प्रधान विरेंद्र सिंह, आदि ने भी विचार रखे। संचालन राजकुमार गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अलावा कानूनगो, लेखपाल आदि मौजूद रहे।
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