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प्रेम से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव : साध्वी चित्रा
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:26 AM IST
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प्रेम से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव : साध्वी चित्रा
देवबंद। श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को वृंदावन के संत प्रियदास जी महाराज ने राम-सीता के विवाह का सुंदर चित्रण किया। श्रोताओं ने मंगल गीत गाकर बधाइयां प्रस्तुत कीं।
श्री गीता भवन में रामकथा की अमृत वर्षा करते हुए संत प्रियदास ने कहा कि श्रीराम ने मर्यादा में रहकर अपना धर्म निभाया। भगवान राम के आदर्शों पर चलकर ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। रामचरित्र मानस में कहा गया कि राम नाम ही कलियुग में कल्याण का आधार है। मनुष्य को स्वार्थ रहित होकर मानव सेवा करनी चाहिए। स्वार्थ सिद्धि के लिए किया गया कार्य निष्फल होता है। संत ने बताया कि जिस प्राणी के जीवन में जिस वस्तु का अभाव रहता है, उसकी पूर्ति करना ही मानव सेवा है। मानव सेवा ही ईश्वर की पूजा है। साध्वी चित्रा शुक्ला ने कहा कि प्रेम से ही सारा संसार जुड़ा है। प्रेम से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। सच्चा प्रेम वही होता है जो प्रभु से मिलन कराए। भगवान प्रेम के वश में ही अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। निष्काम भाव से की गई भक्ति सर्वोपरि होती है। सच्चे प्रेम से ही विरह की अनुभूति होती है। छठे दिन कथा के यजमान श्यामलाल भारती रहे। प्रसाद वितरण सतीश सिंघल ने किया। इस मौके पर सुधीर गर्ग, पंकज अग्रवाल, अजय बंसल, बनारसी प्रसाद अग्रवाल, रमेश भसीन, अंकित मित्तल, नीरज मित्तल, वीना गोयल, रेखा गर्ग, वर्षा पंवार आदि रहे।
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देवबंद। श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को वृंदावन के संत प्रियदास जी महाराज ने राम-सीता के विवाह का सुंदर चित्रण किया। श्रोताओं ने मंगल गीत गाकर बधाइयां प्रस्तुत कीं।
श्री गीता भवन में रामकथा की अमृत वर्षा करते हुए संत प्रियदास ने कहा कि श्रीराम ने मर्यादा में रहकर अपना धर्म निभाया। भगवान राम के आदर्शों पर चलकर ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। रामचरित्र मानस में कहा गया कि राम नाम ही कलियुग में कल्याण का आधार है। मनुष्य को स्वार्थ रहित होकर मानव सेवा करनी चाहिए। स्वार्थ सिद्धि के लिए किया गया कार्य निष्फल होता है। संत ने बताया कि जिस प्राणी के जीवन में जिस वस्तु का अभाव रहता है, उसकी पूर्ति करना ही मानव सेवा है। मानव सेवा ही ईश्वर की पूजा है। साध्वी चित्रा शुक्ला ने कहा कि प्रेम से ही सारा संसार जुड़ा है। प्रेम से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। सच्चा प्रेम वही होता है जो प्रभु से मिलन कराए। भगवान प्रेम के वश में ही अपने भक्तों का उद्धार करते हैं। निष्काम भाव से की गई भक्ति सर्वोपरि होती है। सच्चे प्रेम से ही विरह की अनुभूति होती है। छठे दिन कथा के यजमान श्यामलाल भारती रहे। प्रसाद वितरण सतीश सिंघल ने किया। इस मौके पर सुधीर गर्ग, पंकज अग्रवाल, अजय बंसल, बनारसी प्रसाद अग्रवाल, रमेश भसीन, अंकित मित्तल, नीरज मित्तल, वीना गोयल, रेखा गर्ग, वर्षा पंवार आदि रहे।
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