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घुड़सवारी में बाप-बेटे ने चमकाया नाम
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:04 AM IST
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घुड़सवारी में बाप-बेटे ने चमकाया नाम
सहारनपुर। आवास विकास निवासी गुलाब सिंह और उनके बेटे गौरव पुंडीर ने जयपुर में 16 से 30 अगस्त तक आयोजित हुए चिंकारा हॉर्स शो में आठ पदक जीतकर जनपद और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने घुड़सवारी गुरु और पिता गुलाब सिंह को दिया है। शो के तहत कराई गई घुड़सवारी प्रतियोगिता में गौरव पुंडीर ने एक स्वर्ण और पांच कांस्य पदक जीते।
दो स्पर्धाओं में सांत्वना पुरस्कार पर संतोष करना पड़ा। साथ ही उनके पिता रिटायर्ड कैप्टन गुलाब सिंह ने भी प्रतियोगिता में दो कांस्य पदक अपनी झोली में डाले। एक स्पर्धा में उन्हें सांत्वना पुरस्कार दिया गया। जयपुर से लौटते ही दोनों मेरठ में होने वाले हॉर्स शो की तैयारी में जुट गए हैं।
गौरव की बात करें तो वह इससे पहले वर्ष 2008 में आस्ट्रेलिया में हुई प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुका है। दोनों पिता और पुत्र ने अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। गौरव पुंडीर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ही घुड़सवारी में उसके गुरु हैं।
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सहारनपुर। आवास विकास निवासी गुलाब सिंह और उनके बेटे गौरव पुंडीर ने जयपुर में 16 से 30 अगस्त तक आयोजित हुए चिंकारा हॉर्स शो में आठ पदक जीतकर जनपद और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। गौरव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने घुड़सवारी गुरु और पिता गुलाब सिंह को दिया है। शो के तहत कराई गई घुड़सवारी प्रतियोगिता में गौरव पुंडीर ने एक स्वर्ण और पांच कांस्य पदक जीते।
दो स्पर्धाओं में सांत्वना पुरस्कार पर संतोष करना पड़ा। साथ ही उनके पिता रिटायर्ड कैप्टन गुलाब सिंह ने भी प्रतियोगिता में दो कांस्य पदक अपनी झोली में डाले। एक स्पर्धा में उन्हें सांत्वना पुरस्कार दिया गया। जयपुर से लौटते ही दोनों मेरठ में होने वाले हॉर्स शो की तैयारी में जुट गए हैं।
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गौरव की बात करें तो वह इससे पहले वर्ष 2008 में आस्ट्रेलिया में हुई प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुका है। दोनों पिता और पुत्र ने अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। गौरव पुंडीर ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता ही घुड़सवारी में उसके गुरु हैं।
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