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बताएगा परिणाम, कितने असरदार रहे नेताओं के बयान
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सहारनपुर। अब सिर्फ एक दिन शेष रह गया है, 23 मई को प्रत्याशियों की चुनाव में जीत-हार का फैसला सामने आ जाएगा। साथ ही सामने आएगा नेताओं के उन बयानों का असर, जो चुनाव प्रचार के दौरान अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने और जीत सुनिश्चित करने के लिए दिए गए थे।
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार का आरंभ भाजपा ने सहारनपुर जनपद से ही किया था, तो गठबंधन की तरफ से भी पश्चिमी यूपी में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत देवबंद में जनसभा करके की थी। पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन उससे पहले ही सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी।
सहारनपुर की सरजमीं से चुनाव प्रचार की शुरुआत करके भी संदेश देने का प्रयास किया गया था। क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को मां शाकंभरी देवी मंदिर में दर्शन करने के बाद विजय शंखनाद रैली की थी, तो पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नानौता में चुनावी रैली को संबोधित किया था। इसके बाद सात अप्रैल को गठबंधन की तरफ से बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने देवबंद में रैली करके चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था। फिर नौ अप्रैल को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने सहारनपुर में रोड शो किया था। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने जनसभाओं के दौरान अपने तरकश से बयानों के तीर खूब चलाए थे। विपक्षी दलों और नेताओं पर प्रहार किए गए थे, ताकि अपने प्रत्याशी की जीत पक्की कर ली जाए। अब देखना यह होगा कि नेताओं के बयानों का जनता पर कितना असर हुआ, बयानों का फायदा मिला या फिर नुकसान। इसका पता चलने में अब सिर्फ एक दिन शेष रह गया है, क्योंकि 23 मई को मतगणना से सब कुछ सामने आ जाएगा।
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यह दिए गए थे बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अप्रैल को नानौता में जनसभा के दौरान बोटी बोटी वाले बयान की याद दिलाई थी। उन्होंने कहा था कि मुझे मालूम है यहां बोटी बोटी की बात कहने वाला भी है, लेकिन हम तो बेटी-बेटी कहते हैं और बेटियों के हित में कार्य करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने बोटी बोटी करने वाला बयान दिया था, जिसमें इमरान मसूद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। इस बयान की रणनीति में कांग्रेस प्रत्याशी को चुनावी मुकाबले रखना माना गया था, लेकिन जनता ने इसे कितना अहम माना, यह 23 मई को पता चलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को मां शाकंभरी देवी मंदिर के निकट जनसभा में बयान दिया था कि सहारनपुर में मसूद अजहर का दामाद आ गया है। उनका यह बयान काफी चर्चाओं में रहा था, जिस पर कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया भी दी थी। मुख्यमंत्री का बयान भी कांग्रेस प्रत्याशी पर तीखा हमला करके चुनावी गणित माना गया था, लेकिन इसके असर का फल भी 23 मई को सामने आएगा।
सात अप्रैल को देवबंद में हुई गठबंधन की रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने बयान दिया था कि मुस्लिम मतदाताओं को अपना वोट बंटने नहीं देना है, बल्कि गठबंधन के पक्ष में मतदान करना है। इस बयान पर चुनाव आयोग ने ऐतराज जताया था और 72 घंटे के लिए प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया था। बसपा सुप्रीमो का बयान मुस्लिम मतदाताओं को ज्यादा से ज्यादा अपनी तरफ खींचने के लिए था। उस बयान का कितना फायदा गठबंधन को मिल सका, इसका पता 23 मई को मतगणना से सामने आ जाएगा।
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दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 के प्रचार का आरंभ भाजपा ने सहारनपुर जनपद से ही किया था, तो गठबंधन की तरफ से भी पश्चिमी यूपी में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत देवबंद में जनसभा करके की थी। पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन उससे पहले ही सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी।
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सहारनपुर की सरजमीं से चुनाव प्रचार की शुरुआत करके भी संदेश देने का प्रयास किया गया था। क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को मां शाकंभरी देवी मंदिर में दर्शन करने के बाद विजय शंखनाद रैली की थी, तो पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नानौता में चुनावी रैली को संबोधित किया था। इसके बाद सात अप्रैल को गठबंधन की तरफ से बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने देवबंद में रैली करके चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था। फिर नौ अप्रैल को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने सहारनपुर में रोड शो किया था। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं ने जनसभाओं के दौरान अपने तरकश से बयानों के तीर खूब चलाए थे। विपक्षी दलों और नेताओं पर प्रहार किए गए थे, ताकि अपने प्रत्याशी की जीत पक्की कर ली जाए। अब देखना यह होगा कि नेताओं के बयानों का जनता पर कितना असर हुआ, बयानों का फायदा मिला या फिर नुकसान। इसका पता चलने में अब सिर्फ एक दिन शेष रह गया है, क्योंकि 23 मई को मतगणना से सब कुछ सामने आ जाएगा।
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यह दिए गए थे बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अप्रैल को नानौता में जनसभा के दौरान बोटी बोटी वाले बयान की याद दिलाई थी। उन्होंने कहा था कि मुझे मालूम है यहां बोटी बोटी की बात कहने वाला भी है, लेकिन हम तो बेटी-बेटी कहते हैं और बेटियों के हित में कार्य करते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने बोटी बोटी करने वाला बयान दिया था, जिसमें इमरान मसूद के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। इस बयान की रणनीति में कांग्रेस प्रत्याशी को चुनावी मुकाबले रखना माना गया था, लेकिन जनता ने इसे कितना अहम माना, यह 23 मई को पता चलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 मार्च को मां शाकंभरी देवी मंदिर के निकट जनसभा में बयान दिया था कि सहारनपुर में मसूद अजहर का दामाद आ गया है। उनका यह बयान काफी चर्चाओं में रहा था, जिस पर कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया भी दी थी। मुख्यमंत्री का बयान भी कांग्रेस प्रत्याशी पर तीखा हमला करके चुनावी गणित माना गया था, लेकिन इसके असर का फल भी 23 मई को सामने आएगा।
सात अप्रैल को देवबंद में हुई गठबंधन की रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने बयान दिया था कि मुस्लिम मतदाताओं को अपना वोट बंटने नहीं देना है, बल्कि गठबंधन के पक्ष में मतदान करना है। इस बयान पर चुनाव आयोग ने ऐतराज जताया था और 72 घंटे के लिए प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया था। बसपा सुप्रीमो का बयान मुस्लिम मतदाताओं को ज्यादा से ज्यादा अपनी तरफ खींचने के लिए था। उस बयान का कितना फायदा गठबंधन को मिल सका, इसका पता 23 मई को मतगणना से सामने आ जाएगा।