{"_id":"5b92c209867a557f6149c1ac","slug":"151536344585-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शास्त्रीय संगीत की धुनों पर झूमे नेत्रहीन विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शास्त्रीय संगीत की धुनों पर झूमे नेत्रहीन विद्यार्थी
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। स्पिक मैके की विरासत श्रृंखला के तहत शुक्रवार को भारतीय नेत्रहीन विद्यालय विद्यालय में भुवनेश मुकुल कोमलकी के द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी गई। शानदार प्रस्तुति पर नेत्रहीन विद्यालय के बच्चे झूम उठे।
भुवनेश मुकुल कोमकली के साथ तबले पर पवन सेन और हारमोनियम पर अभिषेक शिनकर ने संगत की। भुवनेश ने राग अहीर भैरव में परंपरागत बंदिश रसिया म्हारा और एक ताल में बेग बेग आवो मंदर सुनाकर तालियां बटोरी। स्पिक मैके के समन्वयक पंकज मल्होत्रा ने बताया कि भुवनेश कोमकली ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अपने संगीतज्ञ परिवार में सीखी है। उनके दादा कुमार गंधर्व और दादी वसुंधरा कोमलकी रहीं, जिनके सानिध्य में उन्होंने संगीत सीखा। भुवनेश मुकुल युवा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाजे जा चुके हैं। इस दौरान शेफाली मल्होत्रा भी मौजूद रहीं।
विज्ञापन
भुवनेश मुकुल कोमकली के साथ तबले पर पवन सेन और हारमोनियम पर अभिषेक शिनकर ने संगत की। भुवनेश ने राग अहीर भैरव में परंपरागत बंदिश रसिया म्हारा और एक ताल में बेग बेग आवो मंदर सुनाकर तालियां बटोरी। स्पिक मैके के समन्वयक पंकज मल्होत्रा ने बताया कि भुवनेश कोमकली ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अपने संगीतज्ञ परिवार में सीखी है। उनके दादा कुमार गंधर्व और दादी वसुंधरा कोमलकी रहीं, जिनके सानिध्य में उन्होंने संगीत सीखा। भुवनेश मुकुल युवा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी नवाजे जा चुके हैं। इस दौरान शेफाली मल्होत्रा भी मौजूद रहीं।
विज्ञापन