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दारुल उलूम वक्फ का प्रतिनिधि बनकर मौलाना साद के कार्यक्रम में नहीं गया: मौलाना फरीद
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:00 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। दीनी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना फरीदुद्दीन कासमी के औरंगाबाद में आयोजित तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बुधवार को मौलाना फरीद ने बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया कि वे संस्था के प्रतिनिधि के रूप में वहां नहीं गए थे। बल्कि निजी संबंधों के आधार पर पहुंचे थे।
हजरत निजामुद्दीन मरकज दिल्ली में स्थित तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद द्वारा पैगंबर हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में गलत बयानबाजी करने के बाद विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम और मदरसा मुरादाबाद शाही समेत दूसरे दीनी इदारों ने मौलाना साद से जुड़े लोगों के दीनी इदारों में बयान देने पर पाबंदी लगा दी थी। इतना ही नहीं दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया था कि मौलाना साद भरोसे के लायक नहीं हैं। उधर, दीनी तालीम के दूसरे सबसे बडे इदारे दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना फरीदुद्दीन कासमी द्वारा हाल में ही औरंगाबाद में आयोजित मौलाना साद के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर चर्चाओं का दौर जारी था। बुधवार को इन्हीं चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मौलाना फरीद ने बयान जारी करते हुए स्पष्टीकरण दिया कि वे औरंगाबाद के कार्यक्रम में संस्था के प्रतिनिधि के रूप में नहीं पहुंचे थे। बल्कि कुछ लोगों से उनका निजी संबंध हैं, इसलिए व्यक्तिगत रूप से वह वहां पहुंचे थे। जो लोग इस मामले को लेकर दारुल उलूम और दारुल उलूम वक्फ में दूरियां पैदा करने वाली अफवाह फैला रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। उनके औरंगाबाद दौरे का संस्था से कोई ताल्लुक नहीं है। बल्कि ये उनकी निजी यात्रा थी।
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हजरत निजामुद्दीन मरकज दिल्ली में स्थित तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना साद द्वारा पैगंबर हजरत मूसा अलैहिस्सलाम के बारे में गलत बयानबाजी करने के बाद विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम और मदरसा मुरादाबाद शाही समेत दूसरे दीनी इदारों ने मौलाना साद से जुड़े लोगों के दीनी इदारों में बयान देने पर पाबंदी लगा दी थी। इतना ही नहीं दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया था कि मौलाना साद भरोसे के लायक नहीं हैं। उधर, दीनी तालीम के दूसरे सबसे बडे इदारे दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना फरीदुद्दीन कासमी द्वारा हाल में ही औरंगाबाद में आयोजित मौलाना साद के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर चर्चाओं का दौर जारी था। बुधवार को इन्हीं चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मौलाना फरीद ने बयान जारी करते हुए स्पष्टीकरण दिया कि वे औरंगाबाद के कार्यक्रम में संस्था के प्रतिनिधि के रूप में नहीं पहुंचे थे। बल्कि कुछ लोगों से उनका निजी संबंध हैं, इसलिए व्यक्तिगत रूप से वह वहां पहुंचे थे। जो लोग इस मामले को लेकर दारुल उलूम और दारुल उलूम वक्फ में दूरियां पैदा करने वाली अफवाह फैला रहे हैं, वो सरासर गलत हैं। उनके औरंगाबाद दौरे का संस्था से कोई ताल्लुक नहीं है। बल्कि ये उनकी निजी यात्रा थी।
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