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भगवान श्रीकृष्ण की कथा को समझना कठिन: चेतन्य
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भगवान श्रीकृष्ण की कथा को समझना कठिन: चैतन्य
सहारनपुर। समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की कथा को समझना बड़ा कठिन है। इनकी कथा को तत्ववेत्ता, गुरु या भक्त ही सही प्रकार से समझा सकते हैं।
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री सिद्घपीठ मां भगवती बगलामुखी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का रूप नाम और लीला सरल है। भगवान राम को जाने बिना और उनकी लीलाओं का श्रवण किए बिना श्रीकृष्ण को जाना नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि गोपी का अर्थ अपनी इंद्रियों से भगवान कृष्ण के साथ जुड़ जाना है, जो आंख, नाक, कान, जिह्वा और त्वचा इन पांच ज्ञान इंद्रियों से भगवान की भक्ति का रसपान करें, उसे ही गोपी कहते हैं। बड़े-बड़े महात्मा गोपियों के चरण रज की वंदना करते हैं। सारा संसार जिनकी चरण वंदना करते हें, वह श्री कृष्ण भी गोपी की चरणरज की चाह रखते हैं। गोपी का अर्थ स्त्री या पुरुष नहीं है। गोपी एक भाव है। भगवान शिव, चंद्रमा, कामदेव ब्रह्मा भी गोपी बनकर श्री कृष्ण की लीला में सम्मिलित हुए हैं। भगवान शिव आज भी वृंदावन में गोपेश्वर बनकर विराजमान है। इस दौरान विजय, रामपाल, रकम सिंह, किशन, जसवंत सिंह, प्रदीप अरोड़ा, गोवर्धन धीमान, सरोज वशिष्ठ, पूनम शर्मा, रजनी पुंडीर, राकेश शर्मा, सुंदरपाल धीमान, रीना, संतोष, मिथलेश शर्मा मौजूद रहे।
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सहारनपुर। समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की कथा को समझना बड़ा कठिन है। इनकी कथा को तत्ववेत्ता, गुरु या भक्त ही सही प्रकार से समझा सकते हैं।
ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री सिद्घपीठ मां भगवती बगलामुखी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का रूप नाम और लीला सरल है। भगवान राम को जाने बिना और उनकी लीलाओं का श्रवण किए बिना श्रीकृष्ण को जाना नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि गोपी का अर्थ अपनी इंद्रियों से भगवान कृष्ण के साथ जुड़ जाना है, जो आंख, नाक, कान, जिह्वा और त्वचा इन पांच ज्ञान इंद्रियों से भगवान की भक्ति का रसपान करें, उसे ही गोपी कहते हैं। बड़े-बड़े महात्मा गोपियों के चरण रज की वंदना करते हैं। सारा संसार जिनकी चरण वंदना करते हें, वह श्री कृष्ण भी गोपी की चरणरज की चाह रखते हैं। गोपी का अर्थ स्त्री या पुरुष नहीं है। गोपी एक भाव है। भगवान शिव, चंद्रमा, कामदेव ब्रह्मा भी गोपी बनकर श्री कृष्ण की लीला में सम्मिलित हुए हैं। भगवान शिव आज भी वृंदावन में गोपेश्वर बनकर विराजमान है। इस दौरान विजय, रामपाल, रकम सिंह, किशन, जसवंत सिंह, प्रदीप अरोड़ा, गोवर्धन धीमान, सरोज वशिष्ठ, पूनम शर्मा, रजनी पुंडीर, राकेश शर्मा, सुंदरपाल धीमान, रीना, संतोष, मिथलेश शर्मा मौजूद रहे।
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