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शहीदों की चिताओं पर....

Thu, 26 Jul 2018 12:20 AM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 12:20 AM IST
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शहीदों की चिताओं पर....
गंगोह (सहारनपुर)। कारगिल में अपने सीने पर गोली खाकर लांसनायक राजेश बैरागी ने सहारनपुर का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया था। ग्राम जेहरा के राजेश बैरागी की शहादत ने हिंदुस्तान का परचम तो लहरा दिया, लेकिन प्रशासन उनकी शहादत पर किए गए वादों को भूल बैठा। उनके वयोवृद्ध बीमार माता-पिता बेहद गरीबी में जीवन बसर कर रहे हैं। शहीद का गांव भी बदहाल है।
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वर्ष 1999 में पाकिस्तान से हुए कारगिल युद्ध में गांव जेहरा निवासी पैराशूट रेजीमेंट में तैनात लांसनायक राजेश बैरागी शहीद हो गए थे। उनके अंतिम संस्कार के मौके पर जिला प्रशासन ने गंगोह के सहारनपुर बस अड्डा चौक पर शहीद की प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही पिता को खेती के लिए जमीन देने का भी आश्वासन दिया गया था। इन घोषणाओं को आज तक पूरा नहीं किया गया है। इसके अलावा लापरवाही के चलते शहीद राजेश बैरागी के नाम से गंगोह वजीरपुर मार्ग का नामकरण कर शिलापट लगाया गया था। लापरवाही के कारण वह शिलापट गायब हो चुका है। अब बस केवल गांव दूधला में ही जेहरा जा रहे मार्ग पर एक शिलापट लगा हुआ है। पिता ताराचंद एवं भाई राकेश बैरागी का कहना है कि शहीदों को शासन, प्रशासन एवं नेता चंद दिनों बाद ही भूल जाते हैं। कहा कि अब तो राष्ट्रीय पर्वों एवं कारगिल दिवस तक पर प्रशासन की ओर से कोई गांव तक नहीं आता।
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-- तंगहाली में जीवन बिता रहे शहीद के बूढ़े माता-पिता
-पेंशन के लिए करना पड़ता है साल भर इंतजार
-दवाई के लिए भी लेना पड़ रहा उधार
गंगोह। कारगिल युद्ध में शहीद हुए लांस नायक राजेश बैरागी के 90 वर्षीय वयोवृद्ध पिता ताराचंद बैरागी और 85 वर्षीय माता कांति देवी को जहां अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। वहीं सरकार से अनेक शिकायतें है। बेटे को याद कर ताराचंद की आंखें डबडबा जाती हैं। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि शहादत के बाद सरकार ने उनकी पेंशन तो आरंभ कर दी थी, लेकिन उन्हें पेंशन के लिए साल-साल भर इंतजार करना पड़ता है। उनका कहना है कि पेंशन न मिलने के कारण वह अपना और शहीद की मां का उपचार तक नहीं करा पा रहे हैं। दवा के लिए भी उन्हें उधार लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बेटे के शहीद होने के बाद बहू भी उन्हें छोड़कर चली गई। जो आजकल यमुनानगर में रह रही है। बताया कि बहू पौत्र के साथ कभी कभी गांव तो आ जाती है पर उनकी कोई मदद नहीं करती है।
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फोटो समाचार-04
- गांव जेहरा में शहीद राजेश बैरागी मार्ग पर भरा हुआ तालाब का गंदा पानी
गांव जेहरा में शहीद राजेश बैरागी मार्ग पर भरा हुआ है गंदा पानी
गंगोह। शहीद राजेश बैरागी का पैतृक गांव जेहरा पूरी तरह बदहाल है। आलम यह है कि शहीद के नाम से घोषित किए गए मार्ग पर करीब चार माह से तालाब का गंदा पानी भरा हुआ है। सुखरा, रविंद्र, बालेश, पप्पन, राजपाल, गुलाब सिंह सहित अनेक लोगों के घरों में पानी भरा हुआ है। गांव के एक छोर से दूसरे छोर पर जाने के लिए गांव से बाहर होकर जाना पड़ता है। मनीष, प्रीतम सिंह, ऋषिपाल ने आरोप लगाया कि प्रशासन गांव की तरफ से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए है। जलभराव और गंदगी के चलते अनेक ग्रामीण संक्रामक रोगों की चपेट में है। बीमारी किसी भी वक्त महामारी का रूप ले सकती है। उन्होंने तालाब के पानी की निकासी कर जलभराव से निजात दिलाने की मांग की है।
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