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सौ करोड़ से अधिक कर दिए खर्च, नहीं सुधरी बिजली की लाइनें
Updated Wed, 11 Jul 2018 12:53 AM IST
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सहारनपुर। बिजली की लाइनों एवं खंभों की स्थिति को सुधारने के लिए विद्युत निगम ने पांच साल में सौ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए। लेकिन बिजली की जर्जर लाइनों की हालत नहीं सुधर सकी है। तार टूटते रहे, हादसे होते रहे और जानें जाती रहीं। जिससे सौ करोड़ रुपये के खर्च को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
सहारनपुर की शहर से लेकर देहात तक बिजली की लाइनों और खंभों की हालत इतनी जर्जर है कि आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों की जान जा रही है। ऐसा नहीं है कि बिजली की जर्जर लाइनों को ठीक करने के लिए शासन से विभाग को बजट न मिला हो। सहारनपुर के लिए पिछले लगभग पांच साल आरएपीडीआरपी एवं एआरपीडीआरपी योजना के तहत सौ करोड़ रुपये से अधिक सिर्फ जर्जर लाइनों और खंभों को ही ठीक कराने में लगा दिए। लेकिन बिजली की लाइनें जस की तस बनी रहीं। जरा से तेज हवा के झोंके से रेशम की डोरी की तरह टूटती रहीं। जरा सा लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये कहां खर्च कर दिए, इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं है।
रामपुर मनिहारन में सोमवार की शाम को टूटकर लटके जर्जर तारों से छूकर किसान अमर सिंह की मौत हो गई, जबकि किसान हरिओम सिंह झुलस गए। सिर्फ यही नहीं अंबेहटा में मंगलवार को सुबह ही बस स्टैंड के पास तीन खंभे टूटकर गिर पड़े। जिससे भगदड़ मच गई। स्कूली छात्र एवं अन्य लोग बाल-बाल बचे। ऐसे हादसे जिले में लगातार हो रहे हैं।
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देवबंद के मोहल्ला सराय काहरान में 11 अप्रैल को हाईटेंशन लाईन का तार टूटकर एलटी लाईन पर गिर गया था। जिससे कई मकानों में क रंट फैल गया था। करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसे नसीम (21) पुत्र रशीद और मोहल्ला लाल मस्जिद निवासी सावेज (16) पुत्र असलम की मौत हो गई थी। जबकि साहिल (15) पुत्र सत्तार और रियासत (32) पुत्र मुश्ताक, पप्पू, शमशाद, शहजाद, आजाद, विजय, सोनू, सादिक झुलस गए थे।
सरसावा क्षेत्र में बिजली का तार टूटने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। जून में ही नगर में तार टूटने की 22 घटनाएं हुईं। जुलाई के दस दिन में ही तार टूटने के 11 मामले सामने आ चुके हैं।
बड़गांव क्षेत्र के दल्हेड़ी में बिक्रम सिंह का करीब चार बीघा गन्ना, खुदाबक्सपुर में धर्मवीर, जड़ौदापाड़ा में विनोद त्यागी सहित करीब दस किसानों की फसलें दो माह में जलने की घटनाएं हो चुकीं हैं।
अंबेहटा में 24 जून को मोहल्ला कोटला नई बस्ती के गुलफाम के दस माह के बेटे रिहान की करंट से मौत रिहान हो गई थी।
नागल में नगली निवासी नरेश की चार बीघा गन्ने की फसल जली। मीरपुर के मन्नू वालिया की करीब तीन बीघा गन्ने की फसल, गांगनौली के रणवीर सिंह की चार बीघा गन्ने की फसल जली। इसके अलावा भी कई किसानों की बिजली का तार टूटने से फसलें जली। करीब तीन माह पहले गांव तासीपुर में लकड़ी बीनते हुए एक व्यक्ति की टूटे पड़े तारों से मौत हो गई थी।
बेहट के गांव नोगावा में जर्जर विद्युत लाइन से कई मौत हो चुकी हैं। इस गांव में आने वाली विद्युत सप्लाई की लाइन घने आम के बागों से होकर गुजर रही है रोजाना तार टूटने की घटनाएं होती है।
नकुड़ में जर्जर बिजली के तार टूटने से लगातार हादसे हो रहे हैं। तार टूटकर गिरने से कई किसानों की गेहूं एवं गन्ने की फसलें जल चुकी हैं। गांव साल्हापुर में करीब दो माह पूर्व तार टूटकर गिरने से एक किसान की दुधारू गाय की मौत हो गई थी तथा एक दुकान में आग से हजारों का नुकसान हो गया था। भाकियू के युवा विंग के जिलाध्यक्ष मेवाराम ने बताया कि वह अनेकों बार शिकायत कर जर्जर तारों को बदलवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गागलहेड़ी में जर्जर तारों के टूटने से खजूरी गांव में गन्ने के खेत में आग लगने से कई बीघा गन्ना जलकर राख हुआ था। बेहडी़ गांव में भी पांच बीघा गन्ना जलकर स्वाह हुआ था।
लगातार बदलवाए जा रहे हैं जर्जर तार
विद्युत निगम देहात के अधीक्षण अभियंता बीके शर्मा का कहना है कि अधिकांश लाइनें तो ठीक हुईं थी, लेकिन कई जगह बारिश और पेड़ों के चलते लाइनें टूट रही हैं। तार भी कमजोर हो रहे हैं। विद्युत निगम जर्जर तारों को बदलवाने का लगातार कार्य कर रहा है।
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सहारनपुर की शहर से लेकर देहात तक बिजली की लाइनों और खंभों की हालत इतनी जर्जर है कि आए दिन हादसे हो रहे हैं। लोगों की जान जा रही है। ऐसा नहीं है कि बिजली की जर्जर लाइनों को ठीक करने के लिए शासन से विभाग को बजट न मिला हो। सहारनपुर के लिए पिछले लगभग पांच साल आरएपीडीआरपी एवं एआरपीडीआरपी योजना के तहत सौ करोड़ रुपये से अधिक सिर्फ जर्जर लाइनों और खंभों को ही ठीक कराने में लगा दिए। लेकिन बिजली की लाइनें जस की तस बनी रहीं। जरा से तेज हवा के झोंके से रेशम की डोरी की तरह टूटती रहीं। जरा सा लोड बढ़ते ही ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपये कहां खर्च कर दिए, इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं है।
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रामपुर मनिहारन में सोमवार की शाम को टूटकर लटके जर्जर तारों से छूकर किसान अमर सिंह की मौत हो गई, जबकि किसान हरिओम सिंह झुलस गए। सिर्फ यही नहीं अंबेहटा में मंगलवार को सुबह ही बस स्टैंड के पास तीन खंभे टूटकर गिर पड़े। जिससे भगदड़ मच गई। स्कूली छात्र एवं अन्य लोग बाल-बाल बचे। ऐसे हादसे जिले में लगातार हो रहे हैं।
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देवबंद के मोहल्ला सराय काहरान में 11 अप्रैल को हाईटेंशन लाईन का तार टूटकर एलटी लाईन पर गिर गया था। जिससे कई मकानों में क रंट फैल गया था। करंट की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलसे नसीम (21) पुत्र रशीद और मोहल्ला लाल मस्जिद निवासी सावेज (16) पुत्र असलम की मौत हो गई थी। जबकि साहिल (15) पुत्र सत्तार और रियासत (32) पुत्र मुश्ताक, पप्पू, शमशाद, शहजाद, आजाद, विजय, सोनू, सादिक झुलस गए थे।
सरसावा क्षेत्र में बिजली का तार टूटने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। जून में ही नगर में तार टूटने की 22 घटनाएं हुईं। जुलाई के दस दिन में ही तार टूटने के 11 मामले सामने आ चुके हैं।
बड़गांव क्षेत्र के दल्हेड़ी में बिक्रम सिंह का करीब चार बीघा गन्ना, खुदाबक्सपुर में धर्मवीर, जड़ौदापाड़ा में विनोद त्यागी सहित करीब दस किसानों की फसलें दो माह में जलने की घटनाएं हो चुकीं हैं।
अंबेहटा में 24 जून को मोहल्ला कोटला नई बस्ती के गुलफाम के दस माह के बेटे रिहान की करंट से मौत रिहान हो गई थी।
नागल में नगली निवासी नरेश की चार बीघा गन्ने की फसल जली। मीरपुर के मन्नू वालिया की करीब तीन बीघा गन्ने की फसल, गांगनौली के रणवीर सिंह की चार बीघा गन्ने की फसल जली। इसके अलावा भी कई किसानों की बिजली का तार टूटने से फसलें जली। करीब तीन माह पहले गांव तासीपुर में लकड़ी बीनते हुए एक व्यक्ति की टूटे पड़े तारों से मौत हो गई थी।
बेहट के गांव नोगावा में जर्जर विद्युत लाइन से कई मौत हो चुकी हैं। इस गांव में आने वाली विद्युत सप्लाई की लाइन घने आम के बागों से होकर गुजर रही है रोजाना तार टूटने की घटनाएं होती है।
नकुड़ में जर्जर बिजली के तार टूटने से लगातार हादसे हो रहे हैं। तार टूटकर गिरने से कई किसानों की गेहूं एवं गन्ने की फसलें जल चुकी हैं। गांव साल्हापुर में करीब दो माह पूर्व तार टूटकर गिरने से एक किसान की दुधारू गाय की मौत हो गई थी तथा एक दुकान में आग से हजारों का नुकसान हो गया था। भाकियू के युवा विंग के जिलाध्यक्ष मेवाराम ने बताया कि वह अनेकों बार शिकायत कर जर्जर तारों को बदलवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गागलहेड़ी में जर्जर तारों के टूटने से खजूरी गांव में गन्ने के खेत में आग लगने से कई बीघा गन्ना जलकर राख हुआ था। बेहडी़ गांव में भी पांच बीघा गन्ना जलकर स्वाह हुआ था।
लगातार बदलवाए जा रहे हैं जर्जर तार
विद्युत निगम देहात के अधीक्षण अभियंता बीके शर्मा का कहना है कि अधिकांश लाइनें तो ठीक हुईं थी, लेकिन कई जगह बारिश और पेड़ों के चलते लाइनें टूट रही हैं। तार भी कमजोर हो रहे हैं। विद्युत निगम जर्जर तारों को बदलवाने का लगातार कार्य कर रहा है।