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4.43 लाख पशुओं के ईलाज के लिए मात्र 1
Updated Thu, 21 Jun 2018 12:40 AM IST
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सहारनपुर। जिले में चार लाख 43 हजार से अधिक पालतू पशुओं के इलाज का जिम्मा मात्र 18 सरकारी पशु चिकित्सकों पर है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पशुओं की हालत कैसी होगी। इतना ही नहीं सरकारी चिकित्सकों की कमी और पशुओं की बीमारियों के कारण झोला छाप चिकित्सक खूब फल फूल रहे हैं। इन झोलाछाप चिकित्सकों से पशुओं का इलाज तो हो नहीं रहा है, उलटे पशु पालकों की जेब और कट रही है।
बरसात के दिनों में पशुओं में संक्रामक रोग तेजी से फैलता है। समय पर इलाज ना मिलने के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में खुरपका, मुंहपका, गलाघोंटू रोग की चपेट में आकर पशु दम तोड़ देते हैं। पिछले दिनों गांव सांवलपुर नवादा में अशोक शर्मा के तीन पशुओं की बीमारी से मौत हो गई थी। इससे पूर्व भी गांव कई पशुओं की जान जा चुकी है। यह तो उदाहरण मात्र है। इसी तरह जनपद में बीमारी से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सकों की कमी के चलते इलाज समय पर नहीं मिल रहा है। पशुपालन विभाग के मुताबिक जनपद में पशु चिकित्सकों के 36 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष मात्र 18 ही पशु चिकित्सक तैैनात हैं। यानी पशु चिकित्सकों की संख्या में 50 फीसदी की कमी है। शहर सहित पूरे जिले में पालतू पशुओं की संख्या चार लाख 43 हजार से अधिक है। सरकारी चिकित्सकों की कमी के चलते झोलाछाप चिकित्सकों को बढ़ावा मिल रहा है। पशु स्वामियों को मजबूरन झोलाछाप चिकित्सकों से पशुओं का इलाज करना पड़ता है, जिससे बीमारी खत्म होने के बजाए बढ़ जाती है।
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टीकाकारण अभियान हो रहा प्रभावित
सहारनपुर। पशुओं में बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। 18 चिकित्सकों को ही पूरे जनपद में टीकाकरण अभियान संचालित करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान की रफ्तार धीमी है।
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जिले में पालतू पशुओं की संख्या में चार लाख 43 हजार से अधिक है। पशु चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान प्रभावित होता रहा है, लेकिन अभियान को सफल बनाने के लिए विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। ----------वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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बरसात के दिनों में पशुओं में संक्रामक रोग तेजी से फैलता है। समय पर इलाज ना मिलने के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में खुरपका, मुंहपका, गलाघोंटू रोग की चपेट में आकर पशु दम तोड़ देते हैं। पिछले दिनों गांव सांवलपुर नवादा में अशोक शर्मा के तीन पशुओं की बीमारी से मौत हो गई थी। इससे पूर्व भी गांव कई पशुओं की जान जा चुकी है। यह तो उदाहरण मात्र है। इसी तरह जनपद में बीमारी से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सकों की कमी के चलते इलाज समय पर नहीं मिल रहा है। पशुपालन विभाग के मुताबिक जनपद में पशु चिकित्सकों के 36 पद स्वीकृत हैं, जिनके सापेक्ष मात्र 18 ही पशु चिकित्सक तैैनात हैं। यानी पशु चिकित्सकों की संख्या में 50 फीसदी की कमी है। शहर सहित पूरे जिले में पालतू पशुओं की संख्या चार लाख 43 हजार से अधिक है। सरकारी चिकित्सकों की कमी के चलते झोलाछाप चिकित्सकों को बढ़ावा मिल रहा है। पशु स्वामियों को मजबूरन झोलाछाप चिकित्सकों से पशुओं का इलाज करना पड़ता है, जिससे बीमारी खत्म होने के बजाए बढ़ जाती है।
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टीकाकारण अभियान हो रहा प्रभावित
सहारनपुर। पशुओं में बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। 18 चिकित्सकों को ही पूरे जनपद में टीकाकरण अभियान संचालित करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान की रफ्तार धीमी है।
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जिले में पालतू पशुओं की संख्या में चार लाख 43 हजार से अधिक है। पशु चिकित्सकों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान प्रभावित होता रहा है, लेकिन अभियान को सफल बनाने के लिए विभाग की ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है। ----------वाईपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी