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नई शिक्षा नीति में रखी गईं दारुल उलूम की सिफारिशों को देवबंदी उलमा का समर्थन
Updated Sun, 21 Jan 2018 12:02 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। नेशनल एजूकेशन पॉलिसी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) की बैठक में इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम ने जो सिफारिशें रखी हैं उससे देवबंदी उलमा भी इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है कि संस्था की ओर से जो सिफारिशें पेश की गई हैं वो बहुत ही अहम हैं और सरकार को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि दारुल उलूम की ओर से दीनी इदारों में योग को अनिवार्य न करने की जो सिफारिश की गई है वे एकदम सही है। क्योंकि योग एक खास धर्म से जुड़ा हुआ है और इसमें कुछ आसन ऐसे हैं जो मजहबी ऐतबार से ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की तालीमी पॉलिसी किसी खास मजहब के मुताबिक न होनी चाहिए। बल्कि सिलेबस ऐसा होना चाहिए कि उसको सभी धर्मों के लोग आसानी से स्वीकार कर लें। मौलाना वाजदी ने कहा कि ये बात भी सही है कि मदरसों के छात्रों को स्कूल कालेजों के छात्रों के बराबर दर्जा मिलना चाहिए। क्योंकि दीनी इदारों में केवल दीनी पढ़ाई नहीं होती बल्कि हिंदी, इंग्लिश, गणित, इतिहास और साइंस आदि विषय भी पढ़ाए जाते हैं। इसलिए सरकार को दारुल उलूम की सिफारिशों को बेहद गंभीरता से लेते हुए इस पर अमल करना चाहिए। ताकि तालीम को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा न हो।
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तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि दारुल उलूम की ओर से दीनी इदारों में योग को अनिवार्य न करने की जो सिफारिश की गई है वे एकदम सही है। क्योंकि योग एक खास धर्म से जुड़ा हुआ है और इसमें कुछ आसन ऐसे हैं जो मजहबी ऐतबार से ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की तालीमी पॉलिसी किसी खास मजहब के मुताबिक न होनी चाहिए। बल्कि सिलेबस ऐसा होना चाहिए कि उसको सभी धर्मों के लोग आसानी से स्वीकार कर लें। मौलाना वाजदी ने कहा कि ये बात भी सही है कि मदरसों के छात्रों को स्कूल कालेजों के छात्रों के बराबर दर्जा मिलना चाहिए। क्योंकि दीनी इदारों में केवल दीनी पढ़ाई नहीं होती बल्कि हिंदी, इंग्लिश, गणित, इतिहास और साइंस आदि विषय भी पढ़ाए जाते हैं। इसलिए सरकार को दारुल उलूम की सिफारिशों को बेहद गंभीरता से लेते हुए इस पर अमल करना चाहिए। ताकि तालीम को लेकर किसी तरह का कोई विवाद खड़ा न हो।
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