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पांच कन्याओं के विवाह और भंडारे के साथ श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
Updated Wed, 13 Sep 2017 01:16 AM IST
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पांच कन्याओं के विवाह और भंडारे के साथ श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
गंगोह (सहारनपुर)। पांच कन्याओं के विवाह और विशाल भंडारे के साथ बाबा बंशीवालो के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा संपन्न हो गई। कथा व्यास रजनीश महाराज ने बताया कि भगवान भोग के नही भाव के भूखे होते हैं।
कथा व्यास आचार्य रजनीश महाराज ने गरीब कन्याओं की शादी कराने को ईश्वरीय कार्य बताते हुए कहा कि वही व्यक्ति परोपकार के कार्य करता है, जिस पर ईश्वरीय अनुकंपा होती है। कहा कि भगवान भोग के नहीं भाव के भूखे हैं। इसीलिए दुर्योधन की मेवा और 56 प्रकार के भोग छोड़ कर उन्होंने विदुर के घर जाकर साग खाया था। महाभारत कथा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि माता कुंती द्वारा भगवान कृष्ण से सदा कोई न कोई दुख देने की प्रार्थना की जाती थी। एक दिन भगवान ने कुंती से पूछा कि बुआ अन्य सब तो सुख सुविधा और ऐश्वर्य की मांग करते है, जबकि तुम दुख देने की प्रार्थना कर रही हो। माता कुंती ने कहा प्रभु जब-जब जीव को कष्ट होता है, तब तब तुम उसके पास रहते हो, इसके विपरीत सुख होने पर जीव आप से अर्थात भगवान से दूर हो जाता है। उन्होेंने कथा को विराम देते हुए देश की सुख शांति एवं खुशहाली की कामना की। तमाम कथा सहयोगियों, श्रोताओं और क्षेत्रवासियों के लिए मंगल कामना करते हुए बाबा बंशीवालो की ओर से सबको आशीर्वाद प्रदान किया। इससे पूर्व आयोजित जनकल्याण हवन में पूर्णाहुति दी गई। इसके उपरांत आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आदेश गोयल, सुंदर लाल, राधेलाल, सोमपाल, ओमप्रकाश, उमेश गोयल, पवन गर्ग, अनुज प्रताप, सुयश गर्ग, प्रदीप सैनी, नूतन गर्ग, योगेंद्र कश्यप, रमेश चंद, सतकुमार, रजनीश मितल, कश्यप कुमार फौजी, अतुल बंसल, रजत गर्ग, राकेश मितल, मदनलाल, राजकुमार, कल्लू, विशाल सैनी, अनिरुद्ध, मुकेश गोयल, शंभु, अंकुर जैन, अरविंद, विपिन, पंकज मित्तल आदि का सहयोग रहा।
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गंगोह (सहारनपुर)। पांच कन्याओं के विवाह और विशाल भंडारे के साथ बाबा बंशीवालो के सानिध्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा संपन्न हो गई। कथा व्यास रजनीश महाराज ने बताया कि भगवान भोग के नही भाव के भूखे होते हैं।
कथा व्यास आचार्य रजनीश महाराज ने गरीब कन्याओं की शादी कराने को ईश्वरीय कार्य बताते हुए कहा कि वही व्यक्ति परोपकार के कार्य करता है, जिस पर ईश्वरीय अनुकंपा होती है। कहा कि भगवान भोग के नहीं भाव के भूखे हैं। इसीलिए दुर्योधन की मेवा और 56 प्रकार के भोग छोड़ कर उन्होंने विदुर के घर जाकर साग खाया था। महाभारत कथा का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि माता कुंती द्वारा भगवान कृष्ण से सदा कोई न कोई दुख देने की प्रार्थना की जाती थी। एक दिन भगवान ने कुंती से पूछा कि बुआ अन्य सब तो सुख सुविधा और ऐश्वर्य की मांग करते है, जबकि तुम दुख देने की प्रार्थना कर रही हो। माता कुंती ने कहा प्रभु जब-जब जीव को कष्ट होता है, तब तब तुम उसके पास रहते हो, इसके विपरीत सुख होने पर जीव आप से अर्थात भगवान से दूर हो जाता है। उन्होेंने कथा को विराम देते हुए देश की सुख शांति एवं खुशहाली की कामना की। तमाम कथा सहयोगियों, श्रोताओं और क्षेत्रवासियों के लिए मंगल कामना करते हुए बाबा बंशीवालो की ओर से सबको आशीर्वाद प्रदान किया। इससे पूर्व आयोजित जनकल्याण हवन में पूर्णाहुति दी गई। इसके उपरांत आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आदेश गोयल, सुंदर लाल, राधेलाल, सोमपाल, ओमप्रकाश, उमेश गोयल, पवन गर्ग, अनुज प्रताप, सुयश गर्ग, प्रदीप सैनी, नूतन गर्ग, योगेंद्र कश्यप, रमेश चंद, सतकुमार, रजनीश मितल, कश्यप कुमार फौजी, अतुल बंसल, रजत गर्ग, राकेश मितल, मदनलाल, राजकुमार, कल्लू, विशाल सैनी, अनिरुद्ध, मुकेश गोयल, शंभु, अंकुर जैन, अरविंद, विपिन, पंकज मित्तल आदि का सहयोग रहा।
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