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Saharanpur News: जर्जर भवनों में चल रहे 138 परिषदीय विद्यालय, सुरक्षित नहीं विद्यार्थी

Tue, 28 Mar 2023 12:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Mar 2023 12:16 AM IST
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138 council schools running in dilapidated buildings, students are not safe
नानौता में टूटी पड़ी प्राथमिक विद्यालय की छत।
- ध्वस्त कर दिए जाने के बावजूद 67 स्कूलों के निर्माण के लिए नहीं मिला बजट
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- अन्य विद्यालयों में संबद्घ किए गए हैं विद्यार्थी
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जनपद में 138 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय जर्जर भवनों में चल रहे हैं। जिनमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं। खास बात यह है कि जिन 107 विद्यालयों के जर्जर भवन ध्वस्त कर दिए गए हैं। उनमें भी 67 विद्यालयों के भवन निर्माण का पैसा नहीं मिला है। जिन 40 विद्यालयों के भवनों के लिए पैसा मिला है उनके निर्माण की गति भी बेहद धीमी है। ऐसे में संबंधित विद्यालयों में पंजीकृत विद्यार्थियों को नजदीकी अन्य विद्यालय में संबद्ध किया गया है।
बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जनपद में 14,38 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 245 विद्यालय ऐसे चिह्नित किए गए थे, जिनके भवन जर्जर हैं। यानी भूकंप या बरसात आदि में यह गिर सकते हैं। गत वर्ष अधिकारियों के निर्देश पर 245 में से 107 विद्यालयों के भवन ध्वस्त कर दिए गए थे। शासन से बजट की मांग की गई थी, लेकिन 107 में से मात्र 40 विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए धनराशि जारी हुई। इनमें से 20 विद्यालयों का पैसा यूपी सिडको को जारी किया गया है, जबकि 20 विद्यालयों का पैसा बेसिक शिक्षा विभाग को मिला है। अब 67 विद्यालय ऐेसे रहे हैं, जो ध्वस्त करने के बाद मैदान बना दिए गए हैं, लेकिन उनका पैसा नहीं मिला है।
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निर्माण समन्वयक ने बताया कि बजट की लगातार मांग की जा रही है। 23-24 के बजट में भी पैसे की मांग की गई है। इनके अलावा 245 में से शेष 138 विद्यालयों के भवन जर्जर खड़े हैं, जिनकी शिकायत शिक्षकों और ग्राम प्रधानों के द्वारा भी विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों से की जा चुकी है।
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दीवारों में आईं दरारें, खतरे में नौनिहाल
सहारनपुर। गांव रूपड़ी जुनारदार के ग्राम प्रधान अवनीश कुमार का आरोप है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय जर्जर भवन में चल रहे हैं। इस संबंध में वह जिलाधिकारी से दो बार शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां विद्यालय 1995 में बने थे, जिनके भवन अब जर्जर हो चुके हैं। दीवारों में चौड़ी दरारें आ चुकी हैं, जिनकी वजह से कभी भी हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि शिक्षक दोनों विद्यालयों के विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बिठाकर पढ़ाते हैं, क्योंकि अन्य कक्षों के भवन जर्जर हो चुके हैं।
बरामदे में बैठते हैं बच्चे : नानौता के गांव कमालपुर बकडौली स्थित प्राथमिक विद्यालय जर्जर भवन में चलता है। यहां विद्यालय के कक्षों की छत में लकड़ी की बल्लियां लगी हैं, जिनमें से कई टूटकर लटकी हुई हैं। यहां विद्यार्थियों को बरामदे में बिठाकर पढ़ाया जाता है।
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शहर में भी मैदान बना दिए विद्यालय
महानगर में भी कई विद्यालयों के भवन जर्जर रहे हैं और अब भी हैं। कुछ जगहों पर जर्जर भवनों को ध्वस्त कर दिया गया है, लेकिन उनकी जगह नए भवन का निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे में विद्यार्थियों को अन्य विद्यालयों में संबद्ध किया गया है। मुंशीयान में महीने भर से विद्यालय की जगह मैदान पड़ा है। यहां के विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालय खुमरान पुल में भेजा जा रहा है। अन्य जगह भी इस तरह की समस्या है।
निर्माण समन्वयक का कहना है कि उक्त विद्यालय का भवन स्मार्ट सिटी के द्वारा तैयार किया जाना है। 55 लाख रुपये लागत आएगी, जिसमें से करीब 14 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं।

------ वर्जन:
विभाग के द्वारा 245 विद्यालय चिह्नित किए गए थे, जिनके भवन जर्जर हैं। उनको तोड़कर नए भवन बनाए जाने हैं। विभाग 107 विद्यालयों के भवनों को ध्वस्त कर चुका है। अभी तक 40 के लिए पैसा मिला है। शेष 138 विद्यालयों के भवन जर्जर हैं।
-वैभव जैमिनी, निर्माण समन्वयक, बेसिक शिक्षा विभाग।

नानौता में टूटी पड़ी प्राथमिक विद्यालय की छत।

नानौता में टूटी पड़ी प्राथमिक विद्यालय की छत।

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