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बगैर मूंछ के दाढ़ी रखना हुजुर की सुन्नत, रिजवी दिमाग का इलाज कराएं
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:25 AM IST
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बगैर मूंछ के दाढ़ी रखना हुजूर की सुन्नत : उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। बगैर मूंछ के दाढ़ी रखकर अपनी शक्ल डरावनी बनाना गैर शरई है। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के इस विवादित बयान पर देवबंदी उलमा आग बबूला हो गए हैं।
मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि खालिक-ए-कायनात ने इमान वालों की खूबसूरती और नूरानियत के लिए दाढ़ी रखने को सुन्नत करार दिया है। जो मुसलमानों का लबादा पहनकर इसको डरावना चेहरा बता रहे हैं, मैं समझता हूं कि वो खुद इस लायक है कि उनसे लोगों को डरना चाहिए और समाज को उनसे दूर भागना चाहिए। उन्होंने कहा कि दाढ़ी मूंछ कुदरत का तोहफा है। जितने ऋषिमुनि, पैगंबर और जितने पंडित दुनिया में आए और चले गए, सबने दाढ़ी रखी। मूंछ न होने से चेहरा खराब नहीं होता बल्कि यह हुजूर की सुन्नत है और इस सुन्नत की तौहीन से बचना चाहिए तौबा करनी चाहिए। वरना ऐसा इंसान इस्लाम से खारिज हो जाता है। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि वसीम रिजवी का बयान नफरत से प्रेरित है और वह मोहब्बत की आड़ लेकर नफरत की बात कर रहे हैं। उनके दिलो दिमाग में कुरआन का दर्स देने वाले और दीन की हिफाजत करने वाले उलमा हजरात के लिए जरा भी सम्मान नहीं है। साथ ही उन्होंने रिजवी के बिंदी लगाने और मांग में सिंदूर भरने वाले बयान पर कहा कि रिजवी अपनी बहू बेटियों और बहनों से बिंदी लगवाएंगे, उनकी मांग में सिंदूर भरवाएंगे और हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी के फेरे लगवाएंगे। कहा कि वसीम रिजवी को किसी अच्छे चिकित्सक से अपने दिमाग का इलाज करा लेना चाहिए। दरअसल वसीम रिजवी ने कहा है कि दाढ़ी के साथ मूंछ न रखना सुन्नत नहीं है। ऐसा करने से शक्ल डरावनी हो जाती है और बगैर मूंछ के दाढ़ी रखने वाले मुसलमान कट्टरपंथी सोच के होते हैं। साथ ही कहा कि बिंदी लगाना या मांग भरना औरतों के सुहाग की निशानियां हैं ये पवित्र प्रथा कभी हराम नहीं हो सकती। ऐसे फतवे देने वाले मौलवियों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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देवबंद (सहारनपुर)। बगैर मूंछ के दाढ़ी रखकर अपनी शक्ल डरावनी बनाना गैर शरई है। उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के इस विवादित बयान पर देवबंदी उलमा आग बबूला हो गए हैं।
मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि खालिक-ए-कायनात ने इमान वालों की खूबसूरती और नूरानियत के लिए दाढ़ी रखने को सुन्नत करार दिया है। जो मुसलमानों का लबादा पहनकर इसको डरावना चेहरा बता रहे हैं, मैं समझता हूं कि वो खुद इस लायक है कि उनसे लोगों को डरना चाहिए और समाज को उनसे दूर भागना चाहिए। उन्होंने कहा कि दाढ़ी मूंछ कुदरत का तोहफा है। जितने ऋषिमुनि, पैगंबर और जितने पंडित दुनिया में आए और चले गए, सबने दाढ़ी रखी। मूंछ न होने से चेहरा खराब नहीं होता बल्कि यह हुजूर की सुन्नत है और इस सुन्नत की तौहीन से बचना चाहिए तौबा करनी चाहिए। वरना ऐसा इंसान इस्लाम से खारिज हो जाता है। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के प्रदेशाध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ का कहना है कि वसीम रिजवी का बयान नफरत से प्रेरित है और वह मोहब्बत की आड़ लेकर नफरत की बात कर रहे हैं। उनके दिलो दिमाग में कुरआन का दर्स देने वाले और दीन की हिफाजत करने वाले उलमा हजरात के लिए जरा भी सम्मान नहीं है। साथ ही उन्होंने रिजवी के बिंदी लगाने और मांग में सिंदूर भरने वाले बयान पर कहा कि रिजवी अपनी बहू बेटियों और बहनों से बिंदी लगवाएंगे, उनकी मांग में सिंदूर भरवाएंगे और हिंदू रीति रिवाज के अनुसार शादी के फेरे लगवाएंगे। कहा कि वसीम रिजवी को किसी अच्छे चिकित्सक से अपने दिमाग का इलाज करा लेना चाहिए। दरअसल वसीम रिजवी ने कहा है कि दाढ़ी के साथ मूंछ न रखना सुन्नत नहीं है। ऐसा करने से शक्ल डरावनी हो जाती है और बगैर मूंछ के दाढ़ी रखने वाले मुसलमान कट्टरपंथी सोच के होते हैं। साथ ही कहा कि बिंदी लगाना या मांग भरना औरतों के सुहाग की निशानियां हैं ये पवित्र प्रथा कभी हराम नहीं हो सकती। ऐसे फतवे देने वाले मौलवियों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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