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बिना वुजू किए भी मोबाइल और कंप्यूटर में पढ़ सकते हैं कुरआन: उलमा
Updated Tue, 15 May 2018 12:20 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। बिना वजू किए मोबाइल और कंप्यूटर में कुरआन पाक की तिलावत किए जाने के और उसको स्पर्श किए जाने के मामले में उलमा का कहना है कि मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन पर नजर आने वाली कुरआनी आयतों को बगैर वजू छुआ और पढ़ा जा सकता है।
मोबाइल पर कुरआन पाक पढ़ने और उसको स्पर्श करने के लिए क्या वजू का होना जरूरी है?। इस मसले पर दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर आने वाली कुरआनी आयतों को बगैर वजू छुआ जा सकता है। क्योंकि मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन पर जो आयत नजर आती हैं वो सॉफ्टवेयर है। यानि वो ऐसे शब्द हैं जिनको स्पर्श नहीं किया जा सकता। यह शब्द भी कंप्यूटर या मोबाइल के शीशे पर नहीं बल्कि रैम पर बनते हैं और शीशे से नजर आते हैं। लिहाजा इसे कुरआन का कवर कहा जा सकता है और कवर को बिना वजह छूने की इजाजत है। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर नजर आने वाले शब्दों की मिसाल ऐसी है जैसे कुरआनी आयत किसी कागज पर लिखी हुई हो और वो कागज शीशे के फ्रेम में पैक हो। फिर बाहर से उस शीशे को स्पर्श कर लिया जाए तो उसमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन इसमें महिलाओं के लिए कुछ पाबंदियां रखी गई हैं।
सुब्रमण्यम स्वामी के बयान से उलमा नाराज
देवबंद । भाजपा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी के बयान पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी का इजहार करते हुए कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी इस तरह के बयान देने के आदी हो गए हैं। इसलिए उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
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दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि स्वामी इस वक्त जो कह रहे हैं वो उनकी मजबूरी है। वो बीजेपी और आरएसएस को खुश करने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे में उनके किसी भी बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी इतिहास न भूलें हिंदुस्तान में सदियों से दलित समाज के साथ होने वाले उत्पीड़न और नफरत को खत्म कराने की दिशा में काम करें। उन्हें चाहिए कि वो दलितों अपने मंदिरों में जाने की इजाजत दिलाएं और वर्तमान समय में उनके साथ जो ज्यादती हो रही है उनको बंद कराएं। बता दें कि रविवार को सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अपने बयान में कहा कि मुसलमानों को मान लेना चाहिए कि उनके पूर्वज हिंदू हैं। वैज्ञानिक आधार पर भी यह साबित हो चुका है कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत का डीएनए एक है। दिक्कत तब होती है जब भारतीय मुसलमान मुहम्मद गोरी, मोहम्मद गजनी और औरंगजेब के साथ खुद को जोड़ते हैं।
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मोबाइल पर कुरआन पाक पढ़ने और उसको स्पर्श करने के लिए क्या वजू का होना जरूरी है?। इस मसले पर दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर आने वाली कुरआनी आयतों को बगैर वजू छुआ जा सकता है। क्योंकि मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन पर जो आयत नजर आती हैं वो सॉफ्टवेयर है। यानि वो ऐसे शब्द हैं जिनको स्पर्श नहीं किया जा सकता। यह शब्द भी कंप्यूटर या मोबाइल के शीशे पर नहीं बल्कि रैम पर बनते हैं और शीशे से नजर आते हैं। लिहाजा इसे कुरआन का कवर कहा जा सकता है और कवर को बिना वजह छूने की इजाजत है। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर नजर आने वाले शब्दों की मिसाल ऐसी है जैसे कुरआनी आयत किसी कागज पर लिखी हुई हो और वो कागज शीशे के फ्रेम में पैक हो। फिर बाहर से उस शीशे को स्पर्श कर लिया जाए तो उसमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन इसमें महिलाओं के लिए कुछ पाबंदियां रखी गई हैं।
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सुब्रमण्यम स्वामी के बयान से उलमा नाराज
देवबंद । भाजपा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी के बयान पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी का इजहार करते हुए कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी इस तरह के बयान देने के आदी हो गए हैं। इसलिए उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।
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दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि स्वामी इस वक्त जो कह रहे हैं वो उनकी मजबूरी है। वो बीजेपी और आरएसएस को खुश करने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे में उनके किसी भी बयान को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सुब्रह्मण्यम स्वामी इतिहास न भूलें हिंदुस्तान में सदियों से दलित समाज के साथ होने वाले उत्पीड़न और नफरत को खत्म कराने की दिशा में काम करें। उन्हें चाहिए कि वो दलितों अपने मंदिरों में जाने की इजाजत दिलाएं और वर्तमान समय में उनके साथ जो ज्यादती हो रही है उनको बंद कराएं। बता दें कि रविवार को सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अपने बयान में कहा कि मुसलमानों को मान लेना चाहिए कि उनके पूर्वज हिंदू हैं। वैज्ञानिक आधार पर भी यह साबित हो चुका है कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत का डीएनए एक है। दिक्कत तब होती है जब भारतीय मुसलमान मुहम्मद गोरी, मोहम्मद गजनी और औरंगजेब के साथ खुद को जोड़ते हैं।