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संसदीय परम्पराओं के बेहतरीन ज्ञाता थे हुकुम सिंह

Mon, 05 Feb 2018 01:12 AM IST
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:12 AM IST
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संसदीय परम्पराओं के बेहतरीन ज्ञाता थे हुकुम सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर। कैराना सांसद बाबू हुकुम सिंह के निधन से जहां क्षेत्र में शोक की लहर है वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे अपूर्णीय क्षति बताया है। उनके साथ विधायक रहे नेताओं का कहना है कि वे संसदीय परंपराओं के बेहतरीन जानकार थे। उनमें गजब का राजनीतिक शिष्टाचार था जो उनके कद को ऊंचा बनाता है।
हुकुम सिंह में गजब का राजनीति शिष्टाचार था। वे दूसरे दलों के नेताओं से भी बेहतरीन संबंध रखते थे। एक बार वे मंत्री होते हुए एक कार्यक्रम में आए, तब मैैं किसी पद पर नहीं था, लेकिन मेरे वहां पहुंचते ही उन्होंने मेरे लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी और खाट पर बैठ गए। वे बडे़ अच्छे आदमी थे। हमारे समय में वे लोकदल में आए और विधायक बने थे। आखिर में पलायन के मुद्दे ने उनकी छवि खराब कर दी थी।
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काजी रशीद मसूद पूर्व केंद्रीय मंत्री

वे संसदीय परंपराओं के बेहतरीन ज्ञाता थे। सबसे बड़ी बात यह है कि वे अपने लंबे राजनीतिक करियर में बेदाग रहे। मैं उनके साथ पांच वर्ष विधानसभा में रहा। एक बार मैं बोलकर बैठा तो उन्होंने एक अभिभावक की तरह मुझे समझाया कि सदन में कुछ शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। उन्होंने विधानसभा में हमें बहुत कुछ सिखाया। उनके निधन से अपूर्णीय क्षति हुई है। मैं व्यक्तिगत तौर पर आहत हूूं।
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-पूर्व विधायक एवं कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद

वे संसदीय ज्ञान के बड़े जानकार थे। विधानसभा सदस्य के तौर पर उन्होंने सदन में कई बार अपने अनुभवों से हमारा मार्गदर्शन दिया। उनका निधन बड़ी राजनीतिक क्षति है। विधानसभा में उन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

-- जगपाल सिंह पूर्व विधायक बसपा।

वे सत्ता में रहे हों या विपक्ष में उन्होंने हमेशा किसान, मजदूर और वंचित समाज की बेहतरी के लिए आवाज उठाई। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा और लोकसभा में बड़ी ही कुशलता से उठाया। वे जिस भी दल में रहे उसके नेतृत्व के बेहद करीब रहे। उनकी विधानसभा में बेेहतरीन परफॉरमेंस रही। उनका निधन समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।
---चौधरी रूद्रसैन, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
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