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देवबंद में म्यांमार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:32 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार को लेकर रविवार को सैकड़ों नगरवासियों और मदरसा छात्रों ने म्यांमार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर संयुक्त राष्ट्र संघ में यह मुद्दा उठाने और भारत में पनाह लिए रोहिंग्या शरणार्थियों को मुल्क में ही रहने दिए जाने की मांग की।
रविवार को दारुल उलूम चौक पर जमा हुए सैकड़ों लोग हाथों में म्यांमार सरकार विरोधी बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी करते हुए मस्जिद रशीदिया पर पहुंचे। उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर रोष जताते हुए वहां की सरकार और स्टेट काउंसिलर मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसके उपरांत उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम रामविलास यादव को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि मीडिया और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के मुताबिक पिछले दो माह में म्यांमार की सेना ने सैकड़ों रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या, महिलाओं के साथ बलात्कार व मासूम बच्चों को आग में जिंदा जला दिया। इससे रोहिंग्या मुसलमान वहां से पलायन करने को मजबूर हैं। मांग की गई कि भारत दुनिया का विशाल लोकतांत्रिक देश है। इसलिए भारत सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस नरसंहार को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में आवाज उठाए और म्यांमार सरकार के भारतीय दूतावास को तत्काल प्रभाव से बंद करे। ताकि इस नरसंहार को रोकने के लिए वहां की सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में मानव अधिकारों की रक्षा करते हुए म्यांमार से जान बचाकर भारत पहुंचे रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकालने वाली केंद्र सरकार को कोशिशों पर विराम लगाए जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में शाहनवाज उर्फ मुन्ना, लुतफुर्रहमान सादिक, जीशान नजमी, यासिर अंजुम, मंसूर अंसारी फर्रुख, जुनैद काजमी, सोनू सिद्दीकी, सैयद हारिस, वली वक्कास, अब्दुल कय्यूम, मौ. वक्कार, मंसूर अंसारी, दानिश, फारुख, जुनैद इलाही आदि शामिल रहे।
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रविवार को दारुल उलूम चौक पर जमा हुए सैकड़ों लोग हाथों में म्यांमार सरकार विरोधी बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी करते हुए मस्जिद रशीदिया पर पहुंचे। उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर रोष जताते हुए वहां की सरकार और स्टेट काउंसिलर मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसके उपरांत उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम रामविलास यादव को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि मीडिया और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के मुताबिक पिछले दो माह में म्यांमार की सेना ने सैकड़ों रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या, महिलाओं के साथ बलात्कार व मासूम बच्चों को आग में जिंदा जला दिया। इससे रोहिंग्या मुसलमान वहां से पलायन करने को मजबूर हैं। मांग की गई कि भारत दुनिया का विशाल लोकतांत्रिक देश है। इसलिए भारत सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस नरसंहार को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में आवाज उठाए और म्यांमार सरकार के भारतीय दूतावास को तत्काल प्रभाव से बंद करे। ताकि इस नरसंहार को रोकने के लिए वहां की सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
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प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में मानव अधिकारों की रक्षा करते हुए म्यांमार से जान बचाकर भारत पहुंचे रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकालने वाली केंद्र सरकार को कोशिशों पर विराम लगाए जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में शाहनवाज उर्फ मुन्ना, लुतफुर्रहमान सादिक, जीशान नजमी, यासिर अंजुम, मंसूर अंसारी फर्रुख, जुनैद काजमी, सोनू सिद्दीकी, सैयद हारिस, वली वक्कास, अब्दुल कय्यूम, मौ. वक्कार, मंसूर अंसारी, दानिश, फारुख, जुनैद इलाही आदि शामिल रहे।
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