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यूपी बोर्ड के रिजल्ट को लेकर टेंशन में छात्र
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:16 AM IST
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यूपी बोर्ड के रिजल्ट को लेकर टेंशन में छात्र
सहारनपुर। यूपी बोर्ड का दसवीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम कल यानी 29 अप्रैल को जारी होगा, जिसे लेकर विद्यार्थी टेंशन में हैं। कई बार अपेक्षा या मेहनत के वितरित परिणाम आने पर विद्यार्थी गलत कदम उठा बैठते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह परिणाम आने के दिन अपने बच्चे के साथ रहें। मनो चिकित्सक की मानें तो खराब नंबर आने पर अभिभावकों को अपने बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए।
वरिष्ठ मनो चिकित्सक डॉ. अमरजीत पोपली ने बताया कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा होता है तो कोई डांस में या कोई गाने या खेलों में। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपना चाहिए। यही सही है कि पढ़ाई प्रत्येक बच्चे के लिए जरूरी है, मगर बच्चे को कभी भी इतने प्रेशर में मत डालें कि वह खराब परिणाम आने पर गलत रास्ता चुन ले। बताया कि पूर्व के वर्षों में छात्र खराब परिणाम आने पर गलत कदम उठाते रहे हैं, जिसके बाद अभिभावकों के सामने पछताने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव रखें। खासकर परिणाम आने के समय बच्चे के साथ रहें। यदि परिणाम अपेक्षा के वितरित आता है तो बच्चे का हौसला बढ़ाएं। बच्चे को ऐसे लोगों की कहानी बताएं, जो कम पढ़े लिखे हैं या बार-बार फेल होने के बावजूद वह आज सफल लोगों में शामिल हैं।
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सहारनपुर। यूपी बोर्ड का दसवीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम कल यानी 29 अप्रैल को जारी होगा, जिसे लेकर विद्यार्थी टेंशन में हैं। कई बार अपेक्षा या मेहनत के वितरित परिणाम आने पर विद्यार्थी गलत कदम उठा बैठते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह परिणाम आने के दिन अपने बच्चे के साथ रहें। मनो चिकित्सक की मानें तो खराब नंबर आने पर अभिभावकों को अपने बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए।
वरिष्ठ मनो चिकित्सक डॉ. अमरजीत पोपली ने बताया कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता अलग होती है। कोई पढ़ाई में अच्छा होता है तो कोई डांस में या कोई गाने या खेलों में। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपना चाहिए। यही सही है कि पढ़ाई प्रत्येक बच्चे के लिए जरूरी है, मगर बच्चे को कभी भी इतने प्रेशर में मत डालें कि वह खराब परिणाम आने पर गलत रास्ता चुन ले। बताया कि पूर्व के वर्षों में छात्र खराब परिणाम आने पर गलत कदम उठाते रहे हैं, जिसके बाद अभिभावकों के सामने पछताने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों के साथ आत्मीय जुड़ाव रखें। खासकर परिणाम आने के समय बच्चे के साथ रहें। यदि परिणाम अपेक्षा के वितरित आता है तो बच्चे का हौसला बढ़ाएं। बच्चे को ऐसे लोगों की कहानी बताएं, जो कम पढ़े लिखे हैं या बार-बार फेल होने के बावजूद वह आज सफल लोगों में शामिल हैं।
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