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कवियों ने हास्य रंग रूपी फुहारों से श्रोताओं को किया सराबोर
Updated Thu, 01 Mar 2018 12:17 AM IST
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...दुश्मन को भी गले लगाओ होली में
देवबंद (सहारनपुर)। मजनूवाला रोड स्थित होटल में मंगलवार की रात फाल्गुनी उत्सव हास्य के रंग गीत गजल के संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें विभिन्न शहरों से पहुंचे कवियों ने अपनी हास्य रंग रूपी फुहारों से श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा नेता राकेश गांगुली ने किया। दीप प्रज्ज्वलित विपिन भारतीय व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण चौधरी ओमपाल सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. शुभम त्यागी की सरस्वती वंदना से हुआ। कवि राशिद कमाल ने होली पर्व पर कुछ यूं कहा शिकवे गिले सब भूल भी जाओ होली है, दुश्मन को भी गले लगाओ होली में, चाहत के रंगों को मिलाकर पानी में, नफरत के शोलों को बुझाओ होली में। मेरठ के डा. शुभम त्यागी ने कहा रंग-रंगीला गीला-गीला प्यारा मौसम आ गया, गुजियों के भी पाग से मीठा-मीठा मौसम आ गया। सहारनपुर के बरकत होलट ने पढ़ा चाहत वफा खुलूस से होली को ढाल दो, नफरत अगर हो दिल में तो फौरन निकाल दो, आपस के भेदभाव मिटा दे जो दोस्त हो, तुम ऐसा रंग लाकर मेरे सिर पर डाल दो। दिल्ली के पंकज गुप्ता ने कहा क्या सुनाऊं इश्क के तीर्थ के बारे में, अंधेरों की कथा थी सारी बांट दी हमने। बलराज मलिक ने पढ़ा नीले पीले चेहरे हैं यहां चेहरों में नूर समाया है, सब मिलके खेले रंगों से होली का शुभ दिन आया है। एटा की निशा महक ने कहा मेरे जलवे नहीं है मोहताज तेरी आंखों के, मैं जब भी चाहूंगी तेरे दिल में उतर जाऊंगी। देवबंद के शमीम देवबंदी ने पढ़ा नाचो कूदो खुशी मनाओ होली है, एक दूजे के गले लगाओ होली है। इनके अलावा नौशाद साबरी, इरफान इलाहाबादी, वक्कार बेधड़क, सलीम रोकिट, डा. ब्रजपाल संत, रियाज अहमद, प्रबल दूबे व चांद देवबंदी आदि ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह तथा मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी ने किया। इस मौके पर संयोजक अरविंद कुमार, संजय विवेक, जमाल अंसारी, डा. बी.पी. सिंह, राजकिशोर गुप्ता, दीपक धीमान, हनीफ अहमद, कुनाल धीमान, महबूब हसन, नितिन गुुप्ता, वैभव अग्रवाल, डा. महेंद्र सैनी, गौरव विवेक, माहिर हसन आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। मजनूवाला रोड स्थित होटल में मंगलवार की रात फाल्गुनी उत्सव हास्य के रंग गीत गजल के संग कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें विभिन्न शहरों से पहुंचे कवियों ने अपनी हास्य रंग रूपी फुहारों से श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन भाजपा नेता राकेश गांगुली ने किया। दीप प्रज्ज्वलित विपिन भारतीय व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण चौधरी ओमपाल सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. शुभम त्यागी की सरस्वती वंदना से हुआ। कवि राशिद कमाल ने होली पर्व पर कुछ यूं कहा शिकवे गिले सब भूल भी जाओ होली है, दुश्मन को भी गले लगाओ होली में, चाहत के रंगों को मिलाकर पानी में, नफरत के शोलों को बुझाओ होली में। मेरठ के डा. शुभम त्यागी ने कहा रंग-रंगीला गीला-गीला प्यारा मौसम आ गया, गुजियों के भी पाग से मीठा-मीठा मौसम आ गया। सहारनपुर के बरकत होलट ने पढ़ा चाहत वफा खुलूस से होली को ढाल दो, नफरत अगर हो दिल में तो फौरन निकाल दो, आपस के भेदभाव मिटा दे जो दोस्त हो, तुम ऐसा रंग लाकर मेरे सिर पर डाल दो। दिल्ली के पंकज गुप्ता ने कहा क्या सुनाऊं इश्क के तीर्थ के बारे में, अंधेरों की कथा थी सारी बांट दी हमने। बलराज मलिक ने पढ़ा नीले पीले चेहरे हैं यहां चेहरों में नूर समाया है, सब मिलके खेले रंगों से होली का शुभ दिन आया है। एटा की निशा महक ने कहा मेरे जलवे नहीं है मोहताज तेरी आंखों के, मैं जब भी चाहूंगी तेरे दिल में उतर जाऊंगी। देवबंद के शमीम देवबंदी ने पढ़ा नाचो कूदो खुशी मनाओ होली है, एक दूजे के गले लगाओ होली है। इनके अलावा नौशाद साबरी, इरफान इलाहाबादी, वक्कार बेधड़क, सलीम रोकिट, डा. ब्रजपाल संत, रियाज अहमद, प्रबल दूबे व चांद देवबंदी आदि ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह तथा मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी ने किया। इस मौके पर संयोजक अरविंद कुमार, संजय विवेक, जमाल अंसारी, डा. बी.पी. सिंह, राजकिशोर गुप्ता, दीपक धीमान, हनीफ अहमद, कुनाल धीमान, महबूब हसन, नितिन गुुप्ता, वैभव अग्रवाल, डा. महेंद्र सैनी, गौरव विवेक, माहिर हसन आदि मौजूद रहे।
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