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माता पिता और आचार्यों पर है समाज को संस्कारित करने की जिम्मेदारी
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माता पिता और आचार्यों पर है समाज को संस्कारित करने की जिम्मेदारी
खेड़ा अफगान (सहारनपुर)। गांव खेड़ा अफगान में चल रहे आर्य समाज के 121 वे वार्षिकोत्सव का रविवार की रात को समापन हो गया। अंतिम दिन विद्वानों ने युवाओं को संस्कारवान बनाने पर जोर दिया।
आर्य समाज के प्रचारक आचार्य धीरज कुमार ने कहा कि संस्कारों से ही मानव निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है। वर्तमान में संस्कार हीन युवा जीवन के लक्ष्य से भटक कर गलत मार्ग पर चला पड़ा जो चिंता का विषय है। कहा कि माता पिता और आचार्यों पर समाज को संस्कारित करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है यदि हमने यह दायित्व पूरा नहीं किया तो समाज वासनाओं की दल दल में धंस जायेगा। आचार्य रणवीर शास्त्री ने कहा कि युवाओं को आर्य समाज से जुड़ कर अपने जीवन के लक्ष्य को पहचानना चाहिए। बताया कि पढ लिख कर दौलत के पीछे दौड़ना ही युवाओं के जीवन का लक्ष्य नहीं है। जब तक युवा चरित्रवान बनकर राष्ट्र निर्माण मे अपना सहयोग नही देता तब तक युवाओं की जवानी के कोई मायने नहीं है। इसलिए जरूरी है कि युवा वर्ग संस्कारवान बनकर राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करें। भजनोपदेशक विनोद कुमार दधिची व सुमित कुमार आर्य ने भी भजनों के माध्यम से अपने विचार रखें। संचालन कर रहे वेदभूषण गुप्ता ने आगंतुकों का आभार जताया। सुधीर शर्मा, वेदमुनि, मनोज आर्य, सुमन आर्य, पूनम गुप्ता, कुंवरपाल सिंह, श्रवण सैनी, भूपेंद्र कुमार, सचिन मित्तल, वेदांत कुमार, विजय कुमार, राजेश आर्य, वीरेंद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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खेड़ा अफगान (सहारनपुर)। गांव खेड़ा अफगान में चल रहे आर्य समाज के 121 वे वार्षिकोत्सव का रविवार की रात को समापन हो गया। अंतिम दिन विद्वानों ने युवाओं को संस्कारवान बनाने पर जोर दिया।
आर्य समाज के प्रचारक आचार्य धीरज कुमार ने कहा कि संस्कारों से ही मानव निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है। वर्तमान में संस्कार हीन युवा जीवन के लक्ष्य से भटक कर गलत मार्ग पर चला पड़ा जो चिंता का विषय है। कहा कि माता पिता और आचार्यों पर समाज को संस्कारित करने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है यदि हमने यह दायित्व पूरा नहीं किया तो समाज वासनाओं की दल दल में धंस जायेगा। आचार्य रणवीर शास्त्री ने कहा कि युवाओं को आर्य समाज से जुड़ कर अपने जीवन के लक्ष्य को पहचानना चाहिए। बताया कि पढ लिख कर दौलत के पीछे दौड़ना ही युवाओं के जीवन का लक्ष्य नहीं है। जब तक युवा चरित्रवान बनकर राष्ट्र निर्माण मे अपना सहयोग नही देता तब तक युवाओं की जवानी के कोई मायने नहीं है। इसलिए जरूरी है कि युवा वर्ग संस्कारवान बनकर राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करें। भजनोपदेशक विनोद कुमार दधिची व सुमित कुमार आर्य ने भी भजनों के माध्यम से अपने विचार रखें। संचालन कर रहे वेदभूषण गुप्ता ने आगंतुकों का आभार जताया। सुधीर शर्मा, वेदमुनि, मनोज आर्य, सुमन आर्य, पूनम गुप्ता, कुंवरपाल सिंह, श्रवण सैनी, भूपेंद्र कुमार, सचिन मित्तल, वेदांत कुमार, विजय कुमार, राजेश आर्य, वीरेंद्र गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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