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अधिवक्ता फरहा फैज ने सीएम को भेजी चिट्ठी
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सहारनपुर। तीन तलाक पीड़िताओं की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाली अधिवक्ता फरहा फैज यूपी पुलिस के रवैये से परेशान हैं। हमले के मामले में पुलिस द्वारा विवेचना में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया है तथा मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजकर पुलिस के बारे में तल्ख टिप्पणी तक की है।
अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि तीन तलाक पीड़िताओं की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में करने के बाद से उन पर कई बार हमले हुए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना मुफ्ती एजाज अरशद कासमी ने तो टीवी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में ही मारपीट कर दी थी। इसके अलावा 2016 में ट्रेन में उन पर हमला किया गया था, जिसकी रिपोर्ट जीआरपी थाना सहारनपुर ने दर्ज करके विवेचना के लिए हजरत निजामुद्दीन दिल्ली ट्रांसफर कर दी थी। इस मामले में एक आरोपी की पहचान कर ली गई थी, जिसे एनआईए ने देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस केस की विवेचना स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दी थी।
अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि उन्होंने दिल्ली पुलिस के साथ ही यूपी पुलिस के डीजीपी और स्थानीय पुलिस को कई बार बताया कि उक्त हमले में मदरसे के मजहबी जुनून रखने वाले तथा राह से भटके हुए छात्रों का हाथ है और एक हमलावर को देवबंद के रेलवे स्टेशन पर भी देखा था। न्यायालय के समक्ष बयान देने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा मदरसा दारुल उलूम देवबंद को नोटिस भी जारी किया, लेकिन स्थानीय पुलिस के असहयोग और टालमटोल रवैये के कारण दिल्ली पुलिस को निराशा हाथ लगी। उनकी मांग है कि इस प्रकरण की गंभीरता के मद्देनजर कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाए। अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि बुधवार को उन्होंने लखनऊ में प्रेसवार्ता भी की थी, जिसके बाद बृहस्पतिवार को यूपी पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से कॉल भी आई। फरहा फैज ने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी पुलिस का रवैया ठीक नहीं होने से बड़ा कष्ट होता है।
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अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि तीन तलाक पीड़िताओं की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में करने के बाद से उन पर कई बार हमले हुए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना मुफ्ती एजाज अरशद कासमी ने तो टीवी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में ही मारपीट कर दी थी। इसके अलावा 2016 में ट्रेन में उन पर हमला किया गया था, जिसकी रिपोर्ट जीआरपी थाना सहारनपुर ने दर्ज करके विवेचना के लिए हजरत निजामुद्दीन दिल्ली ट्रांसफर कर दी थी। इस मामले में एक आरोपी की पहचान कर ली गई थी, जिसे एनआईए ने देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामले की गंभीरता देखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने इस केस की विवेचना स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दी थी।
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अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि उन्होंने दिल्ली पुलिस के साथ ही यूपी पुलिस के डीजीपी और स्थानीय पुलिस को कई बार बताया कि उक्त हमले में मदरसे के मजहबी जुनून रखने वाले तथा राह से भटके हुए छात्रों का हाथ है और एक हमलावर को देवबंद के रेलवे स्टेशन पर भी देखा था। न्यायालय के समक्ष बयान देने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा मदरसा दारुल उलूम देवबंद को नोटिस भी जारी किया, लेकिन स्थानीय पुलिस के असहयोग और टालमटोल रवैये के कारण दिल्ली पुलिस को निराशा हाथ लगी। उनकी मांग है कि इस प्रकरण की गंभीरता के मद्देनजर कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाए। अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि बुधवार को उन्होंने लखनऊ में प्रेसवार्ता भी की थी, जिसके बाद बृहस्पतिवार को यूपी पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से कॉल भी आई। फरहा फैज ने कहा कि इतने गंभीर मुद्दे पर भी पुलिस का रवैया ठीक नहीं होने से बड़ा कष्ट होता है।
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