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तय समय में पहुंचाया था 113 ट्रक गोला बारुद

Thu, 23 Jul 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 11:21 PM IST
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113 truck ammunition was delivered in due time
कर्नल मोहर सिंह - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। कारगिल में युद्ध शुरू हो चुका था। हमें आदेश मिला था अंबाला के निकट आयुध डिपो से गोला और बारूद पहुंचाने का। तब हम 113 गाड़ियों के काफिले में गोला बारूद लादकर निकले थे। तय समय सात दिन में कारगिल तक युद्ध सामग्री पहुंचाई थी। वह फख्र करने का समय था जब देश की रक्षा के लिए पूरी टीम लगी हुई थी।
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यह कहना है कि 66 आर्टिलरी रेजीमेंट में तैनात रहे कर्नल मोहर सिंह का। मूलरूप से सहारनपुर जनपद के गांव मढ़ निवासी कर्नल मोहर सिंह इन दिनों रुड़की में रहते हैं। वह सहारनपुर के सैनिक कल्याण बोर्ड में सचिव भी हैं। कर्नल मोहर सिंह कहते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान हमें कई टास्क मिले थे। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण टास्क आयुध डिपो से गोला और बारूद पहुंचाने का था। गोला बारूद कारगिल तक जल्द से जल्द पहुंचाना था। 14 आर्ट्री ब्रिगेड देहरादून के अंडर में हमारी रेजीमेंट थी। फख्र की बात है कि सहारनपुर के अधिकारी को गोला बारूद सप्लाई करने का काम सौंपा गया था। उस समय 113 गाड़ियां काफिले में थीं। आर्मी सप्लाई कोर का जत्था साथ था। ट्रैफिक रुल्स का पालन करते हुए हमारा काफिला सात दिन चला था और समय रहते गोला बारूद पहुंचाया था।
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एयरफोर्स के चार जवान हुए थे शहीद
सहारनपुर। कारगिल युद्ध में एयरफोर्स स्टेशन सरसावा के चार जवान भी शहीद हुए थे। कारगिल युद्ध में रसद पहुंचाने के लिए सरसावा एयरबेस से चॉपर का प्रयोग किया गया था। 28 मई 1999 को सरसावा एयरफोर्स स्टेशन से उड़कर कारगिल क्षेत्र की तोलोलिंग की पहाड़ियों में जब एमआई-17 हेलीकॉप्टर से दुश्मनों पर मशीनगनों से गोलियां बरसाते हुए रसद पहुंचाई जा रही थी। उसी समय पाकिस्तान की ओर से किए गए मिसाइल हमले की जद में हेलीकॉप्टर आ गया था। उस हमले में स्क्वाड्रन लीडर राजीव पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस मुहिलान, सार्जेंट पीवीएनआर प्रसाद तथा सार्जेंट आरके साहू वीरगति को प्राप्त हो गए थे। उनकी याद में हर साल 28 मई को सरसावा एयरबेस पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। बीते वर्ष इस कार्यक्रम में एयरफोर्स के चीफ भी शामिल हुए थे।
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