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डंपिंग ग्राउंड का विरोध, लामबंद हो रहे शकलापुरी वासी
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सहारनपुर। शकलापुरी में डंपिंग ग्राउंड का विरोध कई दिन से चल रहा है। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए नगर निगम ने करीब दस दिन से कचरा डालना बंद भी कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर गांव में कचरा नहीं डालने देंगे। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव शकलापुरी धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण गांव है, जहां ऐतिहासिक महादेव मंदिर है। साथ ही पांवधोई नदी का उद्गम स्थल भी शकलापुरी से ही हो रहा है। पास ही कब्रिस्तान भी है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम ने शकलापुरी के पास किराए पर जमीन ली है, जिस पर कचरा निस्तारित किया जा रहा है। जब से कचरा डाला जा रहा है तब से शकलापुरी के साथ ही आसपास के गांवों में मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ा है। गांवों में दुर्गंध की वजह से परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध के बावजूद नगर निगम गांव में और जमीन खरीदने की तैयारी में है। गांव में कचरा न डालने की मांग को लेकर ग्रामीण 15 अप्रैल को डीएम और नगरायुक्त से भी मिलने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन को ज्ञापन दिए जाने के बाद से गांव में कचरा डलना बंद हो गया है। यदि गांव में और कचरा डाला गया तो बीमारियां फैलने का खतरा रहेगा। ग्रामीणों ने 27 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखकर गांव में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनाने की मांग की है।
कमेला कॉलोनी में हो चुका है विरोध
कचरा डाले जाने का विरोध पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले नगर निगम शहर की कमेला कॉलोनी में कचरा डालता था। कमेला कॉलोनी के लोग भी कई बार विरोध कर चुके हैं, जिसके बाद अब वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया है।
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शकलापुरी के पास हमने पहले ही तीन साल के लिए लीज पर जमीन ली हुई है, जिसपर छह माह से कचरा डाला जा रहा है। अब हम उसी की बगल में जमीन खरीदने की तैयारी में हैं, जिसमें कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। मगर जमीन का चयन तमाम शर्तों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। -- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त
कचरा निस्तारित करने के लिए हमने सात से आठ जगह देखी हैं। मगर शकलापुरी की जमीन हमें ज्यादा बेहतर लगी है, जिसकी फाइल भी चल रही है। विरोध होने की मुझे जानकारी नहीं है। - संजीव वालिया, महापौर
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ग्रामीणों ने बताया कि गांव शकलापुरी धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण गांव है, जहां ऐतिहासिक महादेव मंदिर है। साथ ही पांवधोई नदी का उद्गम स्थल भी शकलापुरी से ही हो रहा है। पास ही कब्रिस्तान भी है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम ने शकलापुरी के पास किराए पर जमीन ली है, जिस पर कचरा निस्तारित किया जा रहा है। जब से कचरा डाला जा रहा है तब से शकलापुरी के साथ ही आसपास के गांवों में मच्छर और मक्खियों का प्रकोप बढ़ा है। गांवों में दुर्गंध की वजह से परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध के बावजूद नगर निगम गांव में और जमीन खरीदने की तैयारी में है। गांव में कचरा न डालने की मांग को लेकर ग्रामीण 15 अप्रैल को डीएम और नगरायुक्त से भी मिलने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन को ज्ञापन दिए जाने के बाद से गांव में कचरा डलना बंद हो गया है। यदि गांव में और कचरा डाला गया तो बीमारियां फैलने का खतरा रहेगा। ग्रामीणों ने 27 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखकर गांव में डंपिंग ग्राउंड नहीं बनाने की मांग की है।
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कमेला कॉलोनी में हो चुका है विरोध
कचरा डाले जाने का विरोध पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले नगर निगम शहर की कमेला कॉलोनी में कचरा डालता था। कमेला कॉलोनी के लोग भी कई बार विरोध कर चुके हैं, जिसके बाद अब वहां कचरा डालना बंद कर दिया गया है।
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शकलापुरी के पास हमने पहले ही तीन साल के लिए लीज पर जमीन ली हुई है, जिसपर छह माह से कचरा डाला जा रहा है। अब हम उसी की बगल में जमीन खरीदने की तैयारी में हैं, जिसमें कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। मगर जमीन का चयन तमाम शर्तों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। -- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त
कचरा निस्तारित करने के लिए हमने सात से आठ जगह देखी हैं। मगर शकलापुरी की जमीन हमें ज्यादा बेहतर लगी है, जिसकी फाइल भी चल रही है। विरोध होने की मुझे जानकारी नहीं है। - संजीव वालिया, महापौर