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दारुल उलूम पहुंचा बांग्लादेशी न्यायिक व प्रशानिक अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल
Updated Wed, 20 Sep 2017 12:52 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। बांग्लादेशी न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दारुल उलूम पहुंचकर संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद को लेकर मोहतमिम से सवाल किए और इस समस्या से निपटने पर विचार विमर्श भी किया।
मंगलवार की शाम बांग्लादेश के जिला पोस्टिया के जिला जज जूही रिहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दारुल उलूम के मेहमानखाने में पहुंचा। न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। इस दौरान मोहतमिम ने अधिकारियों को संस्था के इतिहास, जंग-ए-आजादी में देवबंदी उलमा का योगदान, तालीमी निजाम और छात्रों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने आतंकवाद को बड़ी समस्या बताते हुए इसके खात्मे को मोहतमिम से कई भी सवाल किए। जिस पर मौलाना बनारसी ने अधिकारियों को बताया कि दारुल उलूम समेत मुल्क के दीनी इदारों ने हमेशा से आतंकवाद की पुरजोर मुखालफत की है। इतना ही नहीं दारुल उलूम ने आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया और आतंकवाद विरोधी सम्मेलन भी आयोजित किया था। उन्होंने कहा कि संस्था का निजाम भारतीय संविधान के अनुसार चलता है। दारुल उलूम पूरी दुनिया में अमन शांति का अलंबदार है। जो मुल्क के कोने कोने से आने वाले छात्रों को तालीम देने के साथ साथ इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। साथ ही मौलाना बनारसी ने यह भी बताया कि पूर्व में गृह मंत्रालय ने दारुल उलूम समेत सभी दीनी मदरसों की जांच कराई थी। जिसके बाद गृहमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी ने संसद में रिपोर्ट पेश करते हुए मदरसों को क्लीनचिट दी थी। इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने दारुल उलूम का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल में बांग्लादेश के त्रिपुर जिले के कमिश्नर रिजवानुल रहमान, डिप्टी कमिश्नर अतीकुर्रहमान समेत 16 सदस्य शामिल रहे। इस मौके पर डीएम पीके पांडेय, एसएसपी बबलू कुमार, एसडीएम रामविलास यादव, सीओ सिद्धार्थ, तंजीम व तरक्की विभाग के प्रभारी अशरफ उस्मानी, मौलाना मुर्तजा, मौलाना तौकीर और मौलाना शफीक आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार की शाम बांग्लादेश के जिला पोस्टिया के जिला जज जूही रिहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दारुल उलूम के मेहमानखाने में पहुंचा। न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारियों ने संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी से मुलाकात की। इस दौरान मोहतमिम ने अधिकारियों को संस्था के इतिहास, जंग-ए-आजादी में देवबंदी उलमा का योगदान, तालीमी निजाम और छात्रों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने आतंकवाद को बड़ी समस्या बताते हुए इसके खात्मे को मोहतमिम से कई भी सवाल किए। जिस पर मौलाना बनारसी ने अधिकारियों को बताया कि दारुल उलूम समेत मुल्क के दीनी इदारों ने हमेशा से आतंकवाद की पुरजोर मुखालफत की है। इतना ही नहीं दारुल उलूम ने आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया और आतंकवाद विरोधी सम्मेलन भी आयोजित किया था। उन्होंने कहा कि संस्था का निजाम भारतीय संविधान के अनुसार चलता है। दारुल उलूम पूरी दुनिया में अमन शांति का अलंबदार है। जो मुल्क के कोने कोने से आने वाले छात्रों को तालीम देने के साथ साथ इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। साथ ही मौलाना बनारसी ने यह भी बताया कि पूर्व में गृह मंत्रालय ने दारुल उलूम समेत सभी दीनी मदरसों की जांच कराई थी। जिसके बाद गृहमंत्री रहे लालकृष्ण आडवाणी ने संसद में रिपोर्ट पेश करते हुए मदरसों को क्लीनचिट दी थी। इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने दारुल उलूम का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल में बांग्लादेश के त्रिपुर जिले के कमिश्नर रिजवानुल रहमान, डिप्टी कमिश्नर अतीकुर्रहमान समेत 16 सदस्य शामिल रहे। इस मौके पर डीएम पीके पांडेय, एसएसपी बबलू कुमार, एसडीएम रामविलास यादव, सीओ सिद्धार्थ, तंजीम व तरक्की विभाग के प्रभारी अशरफ उस्मानी, मौलाना मुर्तजा, मौलाना तौकीर और मौलाना शफीक आदि मौजूद रहे।
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