{"_id":"88f44423e34db5331cb000161771b9a4","slug":"rana-challenged-azam-khan","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘हिम्मत है तो मुजफ्फरनगर आएं आजम’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘हिम्मत है तो मुजफ्फरनगर आएं आजम’
टीम डिजिटल/शामली/देवबंद/मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 09 Nov 2013 02:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोर्ट में पेशी पर आए भाजपा विधायक सुरेश राणा ने प्रदेश सरकार और कैबिनेट मंत्री आजम खान पर खूब भड़ास निकाली।
विज्ञापन
उन्होंने आजम खान को दंगे का मुख्य आरोपी बताते हुए कहा कि यदि आजम में हिम्मत है तो वह मुजफ्फरनगर आकर दिखाएं।
उन्होंने आजम की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग उठाई।
पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे में पेशी पर लाए गए विधायक ने कचहरी परिसर में मौजूद मीडिया कर्मियों से संक्षेप बातचीत में कहा कि वह जनप्रतिनिधि हैं और लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठा रहे हैं।
लेकिन सरकार उनकी आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि, सरकार उन पर चाहे कितने मुकदमे दर्ज कर ले उनकी आवाज दबने वाली नहीं है।
संगीत और राणा मामले में सरकार को झटका
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया कि मुजफ्फरनगर दंगे के मुख्य आरोपी आजम खान ही हैं। उन्होंने चेताया कि यदि आजम में हिम्मत है तो मुजफ्फरनगर आकर दिखाएं।
राणा ने आरोप लगाया कि आजम ने सरकार में रहते हुए करोडों की संपत्ति अर्जित की है। उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए।
हालांकि पुलिस ने काफी कोशिश की कि राणा मीडिया से बातचीत न कर पाएं। राणा ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
पेशी के वक्त भाजपाइयों की भारी भीड़ जमा होने के कारण भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
आजम दोषी नहीं तो मुंह क्यों छिपा रहे हैं
रासुका हटने के बाद जिला कारागार से अन्य मुकदमों की पेशी पर कैराना और देवबंद गए भाजपा विधायकों ने सपा पर निशाना साधा।
विधायकों ने कहा कि आजम खां दंगे के दोषी नहीं हैं तो दंगा पीड़ितों से मुंह क्यों छिपा रहे हैं।
जिला प्रभारी मंत्री होने के बावजूद वह क्यों नहीं आए, इसका जवाब उन्हें जनता को देना चाहिए।
सरधना विधायक संगीत सोम और थाना भवन एमएलए सुरेश राणा ने कोर्ट जाते समय पत्रकारों से बात की।
सोम ने कहा कि प्रदेश सरकार का असली चेहरा सामने आ चुका है। दंगे के दोषी खुले घूम रहे हैं और बेकसूरों को जेलों में डाल दिया गया। शासन और प्रशासन पंगु हो चुका है।
विज्ञापन
यही वजह है कि आज तक जिला शांत नहीं हुआ। रासुका की कार्रवाई अलोकतांत्रिक थी। बोर्ड ने न्याय कर सच्चाई पर अपनी मुहर लगाई है।
सोम ने यह भी कहा कि नंगला मंदौड़ की पंचायत में कोई भड़काऊ भाषण भाजपा नेताओं ने नहीं दिया। विवादित क्लिपिंग यू ट्यूब पर डालने का भी अधिकारियों ने मुझ पर झूठा आरोप मढ़ दिया था।
कैबिनेट मंत्री आजम खां अगर दंगों के दोषी नहीं हैं तो मुजफ्फरनगर के पीड़ितों से मुंह क्यों छिपा रहे हैं। जिला प्रभारी मंत्री होने के बावजूद आज तक जिले में क्यों नहीं पहुंचे।
विधायक सुरेश राणा ने कहा कि जनता के हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे, भले ही उन्हें बार-बार जेल जाना पड़े। सपा लोकसभा चुनाव को लेकर घबरा गई है, इसीलिए दंगे करा रही है।
रासुका हटने पर खिल उठे चेहरे
एक माह से अधिक समय से जेल की सलाखों में कैद भाजपा विधायकों से रासुका हटने की खुशी शुक्रवार को चेहरों पर नजर आई।
कोर्ट में पेशी के लिए दोनों विधायक जैसे ही कारागार से बाहर निकले, समर्थकों की मौजूदगी में दोनों विधायक गले मिले और खुशी का इजहार किया।
प्रदेश में साढ़े चार मुख्यमंत्री: सोम
शासन की ज्यादतियों से खफा सरधना के भाजपा विधायक संगीत सोम ने शुक्रवार को देवबंद कोर्ट में पेशी दौरान सपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि सूबे में साढ़े चार मुख्यमंत्री हैं और असली सीएम अखिलेश यादव सिर्फ आधे मुख्यमंत्री हैं।
अदालत और जेल के चक्कर काटने के बावजूद चेहरे पर मुस्कान लिए शुक्रवार को देवबंद न्यायालय से पेशी के बाद बाहर निकले विधायक संगीत सोम ने कहा कि सपा सरकार तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
उन पर जो झूठी कार्रवाई हो रही है वह सपा सरकार की तुष्टिकरण की नीति का ही नतीजा है। उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, न्याय पालिका किसी का नाजायज उत्पीड़न नहीं होने देगी।
सोम ने कहा कि प्रदेश में साढ़े चार मुख्यमंत्री होने के कारण सरकार पूरी तरह फेल है।
इस कारण प्रदेश में सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं और इंसाफ की आवाज बुलंद करने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
आगे क्या रणनीति होगी के सवाल पर सोम ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह बाद में तय किया जाएगा। इस दौरान स्वागत के लिए पहुंचे कार्यकर्ताओं का उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया।
हालांकि पुलिस की सख्ती के कारण कार्यकर्ता फूलमालाएं पहनाकर विधायक का स्वागत नहीं कर सके। वे मायूस होकर एक तरफ खड़े रहे।
लखनऊ की अन्य महत्वपूर्ण खबरों के लिए क्लिक करें यहां