तिकुनिया कांड के गवाह पर हमला: किसान नेता से हमलावर बोले- कोर्ट में गवाही देने गया तो सीधे सिर में मार देंगे गोली
रामपुर में लखीमपुर खीरी कांड के गवाह पर पांच हमलावरों ने हमला बोल दिया। आरोप है कि एक हमलावर ने 'लखीमपुर कोर्ट में गवाही देने गया तो सीधा सिर में गोली मार देंगे' धमकी देते हुए लाइसेंसी पिस्टल गवाह के मुंह पर मार दी, जिससे वो जख्मी हो गए। पुलिस ने दो नामजद समेत पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रामपुर में तिकुनिया कांड के गवाह पर पांच लोगों ने हमला बोल दिया। आरोप है कि एक हमलावर ने 'लखीमपुर कोर्ट में गवाही देने गया तो सीधा सिर में गोली मार देंगे' धमकी देते हुए लाइसेंसी पिस्टल गवाह के मुंह पर मार दी, जिससे वो जख्मी हो गए। इसके बाद आरोपी किसान नेता को धमकाते हुए बिलासपुर की ओर भाग गए। आरोप है कि हमलावर किसान नेता पर लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड के मामले में गवाही न देने के लिए दबाव बना रहे थे। किसान नेता ने घटना की तहरीर कोतवाली में दी है। इसके बाद पुलिस ने दो लोगों को नामजद करते हुए पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मामले में एसपी ने इसे प्रारंभिक जांच में रोडरेज की घटना बताया है और लखीमपुर कांड की गवाही से इसका कोई संबंध नहीं होने की बात कही है।
यह था मामला
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में किसान आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई थी, इनमें किसान भी शामिल थे। इस मामले में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा का नाम सामने आया था। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
इस मामले में रामपुर के बिलासपुर थाना क्षेत्र के भुकसौरा निवासी हरदीप सिंह पुत्र हरी सिंह भी एक गवाह हैं। उन्होंने बताया कि दो बार कोर्ट में उनकी गवाही भी हो चुकी है। हरदीप सिंह का आरोप है कि रविवार शाम को करीब सात बजे वो अपने मित्र सतिंदर सिंह के साथ बाइक पर सवार होकर नवाबगंज गुरूद्वारे से माथा टेककर आ रहे थे। उनके पीछे उनके ही साथी जगजीत सिंह दूसरी बाइक पर सवार थे। आरोप है कि रास्ते में मेहर सिंह दयोल, सिरबजीत सिंह समेत पांच लोगों ने उनको घेर लिया और हमला बोल दिया। आरोप है कि इस दौरान मेहर सिंह ने अपने लाइसेंसी पिस्टल की बट से उनके मुंह पर हमला कर दिया। जिससे उनके चोटें भी आ गईं हैं। घटना के दौरान कई राहगीर एकत्र हो गए। वो मौके की ओर दौड़े तो हमलावर खुद को बचाते हुए मौके से बिलासपुर की ओर धमकाते हुए फरार हो गए। हरदीप सिंह का आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें लखीमपुर कोर्ट में गवाही देने पर सीधे सिर में गोली मारने तक की धमकी दी है।
घटना की जानकारी किसान नेताओं की दी
हरदीप सिंह ने घटना की जानकारी अपने परिजनों समेत किसान नेताओं और पुलिस अधिकारियों को दी। उनका कहना था कि वह लखीमपुर कांड के गवाह हैं और उन्हें गवाही देने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वह पीछे नहीं हट रहे जिसकी वजह से उनके ऊपर हमला कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह हमला उन्हें डराने के लिए किया गया है, लेकिन वो डरने वाले नहीं हैं। दो बार कोर्ट में जाकर गवाही दे चुके हैं।
हरदीप सिंह ने घटना की तहरीर बिलासपुर कोतवाली में दी। वहीं, इस मामले को लेकर सपा नेता तेेजेंद्र सिंह बिर्क, जगजीत सिंह गिल, गुरचरन सिंह आदि किसान नेता भी कोतवाली पहुंचे और सीओ अरुण कुमार सिंह व कोतवाली प्रभारी तेजवीर सिंह से मिले और रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 323, 504, 506 यानि एकराय होकर मारपीट करना, गाली-गलौज करना और धमकी देने के आरोप में नेता मेहर सिंह, सिरबजीत व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
हरदीप सिंह ने उन पर हमला करने का आरोप लगाते हुए जो एफआईआर दर्ज कराई है। उसमें एक आरोपी मेहर सिंह दयोल को भाजपा पदाधिकारी बताया है। हालांकि इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष अभय गुप्ता का कहना है कि मेहर सिंह दयोल नामक कोई व्यक्ति इस समय पार्टी में पदाधिकारी नहीं है। अगर पूर्व में किसी मोर्चे के पदाधिकारी रहे हों तो उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।
एसपी रामपुर अंकित मित्तल का कहना है कि बिलासपुर क्षेत्र के किसान हरदीप सिंह ने हमले का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। जिस पर दो लोगों को नामजद करते हुए पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच के लिए सीओ बिलासपुर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया गया था। जिसमें वादी व अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की गई तो प्रथम दृष्टया मामला रोडरेज (चालकों द्वारा हिंसक रोष व्यक्त करने) का पाया गया है। अभी तक की जांच में इस घटना का लखीमपुर हिंसा की गवाही से कोई संबंध नहीं है।