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सोशल मीडिया का सावधानी से करें प्रयोग, साइबर क्राइम पर तभी लग सकेगी रोक
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सोशल मीडिया का सावधानी से करें प्रयोग, साइबर क्राइम पर तभी लग सकेगी रोक
राजकीय महिला डिग्री कालेज में महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम पर हुआ वेबिनार
रामपुर। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में मिशन शक्ति विशेष अभियान के महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम विषय पर वेबिनार हुआ। इसमें सोशल मीडिया का सावधानी से प्रयोग करके साइबर क्राइम से बचने का आह्वान किया गया।
मंगलवार को हुई वेबिनार में प्राचार्य डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम आज के दौर में एक आम बात बन गई है। इससे बचने के लिए इंटरनेट से संबंधित जानकारी होनी चाहिए। सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, नहीं तो कभी भी हम साइबर क्राइम की चपेट में आ सकते हैं। मुख्य वक्ता डॉ. अभिमन्यु यादव ने कहा कि साइबर स्टॉकिंग के महिलाओं के प्रति ज्यादा होने की सबसे अधिक संभावना है। एक साइबर स्टॉकर पीड़ित को सीधे शारीरिक खतरे में नहीं डालता है, लेकिन जानकारी इकट्ठा करने के लिए पीड़ित की ऑनलाइन गतिविधि का ध्यान रखता है, विभिन्न रूपों से धमकी देता है। डॉ. नाहिद अंजुम ने कहा कि भारत में हर दूसरे सेकंड, एक महिला साइबर क्राइम का शिकार होती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब एक नया मंच है, जहां हर पल एक महिला सुरक्षा को चुनौती दी जा रही है। महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के प्रभाव शारीरिक से अधिक मानसिक हैं। डॉ. चारु चौधरी ने साइबर क्राइम के कानूनी पहलुओं पर रोशनी डाली और साइबर कानून से संबंधित जानकारी दी। डॉ. सुनीता जायसवाल ने साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. प्रीति लता सिंह, डॉ. मनोरमा चौहान, डॉ. वंदना राठौर और डॉ. मोहम्मद कासिम आदि मौजूद रहे।
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राजकीय महिला डिग्री कालेज में महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम पर हुआ वेबिनार
रामपुर। राजकीय महिला डिग्री कॉलेज में मिशन शक्ति विशेष अभियान के महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम विषय पर वेबिनार हुआ। इसमें सोशल मीडिया का सावधानी से प्रयोग करके साइबर क्राइम से बचने का आह्वान किया गया।
मंगलवार को हुई वेबिनार में प्राचार्य डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि महिला सुरक्षा एवं साइबर क्राइम आज के दौर में एक आम बात बन गई है। इससे बचने के लिए इंटरनेट से संबंधित जानकारी होनी चाहिए। सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, नहीं तो कभी भी हम साइबर क्राइम की चपेट में आ सकते हैं। मुख्य वक्ता डॉ. अभिमन्यु यादव ने कहा कि साइबर स्टॉकिंग के महिलाओं के प्रति ज्यादा होने की सबसे अधिक संभावना है। एक साइबर स्टॉकर पीड़ित को सीधे शारीरिक खतरे में नहीं डालता है, लेकिन जानकारी इकट्ठा करने के लिए पीड़ित की ऑनलाइन गतिविधि का ध्यान रखता है, विभिन्न रूपों से धमकी देता है। डॉ. नाहिद अंजुम ने कहा कि भारत में हर दूसरे सेकंड, एक महिला साइबर क्राइम का शिकार होती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब एक नया मंच है, जहां हर पल एक महिला सुरक्षा को चुनौती दी जा रही है। महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के प्रभाव शारीरिक से अधिक मानसिक हैं। डॉ. चारु चौधरी ने साइबर क्राइम के कानूनी पहलुओं पर रोशनी डाली और साइबर कानून से संबंधित जानकारी दी। डॉ. सुनीता जायसवाल ने साइबर क्राइम को रोकने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. प्रीति लता सिंह, डॉ. मनोरमा चौहान, डॉ. वंदना राठौर और डॉ. मोहम्मद कासिम आदि मौजूद रहे।
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