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गायब हो गए दो सदस्य, नेता प्रतिपक्ष ने सपा विधायकों के साथ दिया धरना

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 01:09 AM IST
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Two members went missing, Leader of Opposition staged a sit-in with SP MLAs
रामपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान के दौरान समाजवादी पार्टी के दो सदस्यों के अचानक गायब होने की खबर मिलते ही सपाइयों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं, सपाइयों का हौसला बढ़ाने रामपुर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आंबेडकर पार्क पर धरने पर बैठ गए। एसडीएम व सीओ ने आक्रोशित कार्यकर्ताओं व सपा नेताओं ने समझाया और शांतिपूर्वक धरना देने की बात कही। रामगोविंद चौधरी ने कहा कि हम तब तक धरने से नहीं उठेंगे, जब तक हमारे दो सदस्य जो गायब हैं वो नहीं मिल जाते।
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शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कलक्ट्रेट में मतदान हो रहा था। कलक्ट्रेट तक जाने के लिए आंबेडकर पार्क के सामने से सिर्फ एक ही रास्ता दिया गया था। लिहाजा, उसी रास्ते के जरिए सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए आ जा रहे थे। इस बीच एक कार में समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के समर्थक सदस्य आ गए, जहां आंबेडकर पार्क से वे पैदल जाने लगे। आरोप है कि बीच में कुछ सादा ड्रेस में आए पुलिस कर्मी उनमें से दो सदस्यों को अपने साथ ले गए हैं। इसी बात को लेकर वे धरने पर बैठ गए। सपाइयों ने जमकर हंगामा काटा।
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नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि समाजवादी पार्टी के 18 जिला पंचायत सदस्यों को इसी गेट से एसडीएम व सीओ को चेक कराकर मतदान के लिए अंदर भेजा था। अब पता चल रहा है कि बीच रास्ते में सादी वर्दी में कुछ लोग थे और हमारे जिला पंचायत सदस्य नुसरत बेग और खलील को सफेद रंग की गाड़ी में बैठाकर ले गए। इस संबंध में हमारी डीएम और एसपी दोनों से ही बात हुई है। हमारे दो वोटरों के हेल्पर बनाए गए हैं, उसके लिए भी डीएम से बात की गई है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि रामपुर में लोकतंत्र और संविधान की हत्या हो रही है।
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ये वोट लोकतंत्र की आत्मा हैं। जब लोकतंत्र को प्रशासन के द्वारा कुचल जाएगा, तो फिर हर हाल में तब तक धरने पर डटे रहेंगे कि जब तक हमारे दोनों सदस्यों को वापस नहीं कर दिया जाता। इस मामले में हमारी कमिश्नर से ही बात हुई है। कहा कि आज मतदान निष्पक्ष दिखाई नहीं दे रहा है। तीन घंटे तक चले इस धरने के बाद में जब निर्वाचन का ऐलान हो गया, तो वे अफसरों के समझाने पर उठकर चले गए। इस मौके पर पूर्व कैबिनेट मंत्री महबूब अली, पूर्व राज्यमंत्री कमाल अख्तर, कानपुर के विधायक अमिताभ वाजपेयी, बिलारी विधायक फहीम, जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार गंगवार समेत तमाम सपाई मौजूद रहे।
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-सपाइयों द्वारा दो सदस्यों के अपहरण/गायब किए जाने का आरोप गलत था। दोनों सदस्य अपनी मर्जी से मतदान करने नहीं आए। जिन दो सदस्यों ने मतदान नहीं किया वो सपा समर्थित भी नहीं थे और कांग्रेस समर्थित थे। दोनों घर पर ही थे और अपनी इच्छा से मतदान के लिए नहीं आए।
-शगुन गौतम, एसपी।
रामपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत पर सपा नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यह बेईमानी की जीत है और लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने सपा समर्थित प्रत्याशी को वोट करने जा रहे दो सदस्यों के अपहरण का भी आरोप लगाया।
शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान दिन भर हंगामे का माहौल रहा। कभी भाजपाइयों ने सपाइयों की कार को लेकर हंगामा कर दिया तो कभी सपाइयों ने चुनाव मे धांधली का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। वहीं सपा समर्थित प्रत्याशी नसरीन जहां के समर्थन में रामपुर आए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि हमें बहुत अरसे से इस बात का अंदाजा था। हमारे 18 सदस्य मतदान के लिए गेट से पार हुए हैं।
मतदान के लिए इनमें से दो सदस्य जो सपा समर्थित प्रत्याशी को वोट करने जा रहे थे, उनको बीच में रास्ते से अपहरण कर लिया गया। इसको लेकर हमने धरना भी दिया। मतदान भी 34 सदस्यों का हुआ, दो सदस्य कहां गए। हमारे सदस्यों ने कसम खाकर वोट दी है। यह जीत फर्जी है। इस बेइमानी के खिलाफ हम चुनाव और राजभवन में शिकायत करेंगे। हमारे 18 सदस्य गए थे और दो गायब हो गए तो भी 16 वोट होने चाहिए थे। ये बेइमानी की जीत है, लोकतंत्र की लूट है। अधिकारी अपना जमीर बेच चुके हैं और भाजपा की तानाशाही सरकार के आगे अपने घुटने टेक चुके हैं।
इससे पहले उन्होंने शनिवार सुबह प्रेसवार्ता में भी प्रशासन द्वारा सहायक बनाए जाने को लेकर सवालिया निशान खड़े थे। एक सपा समर्थित सदस्य ने भी कहा कि वह शिक्षित हैं और स्वस्थ हैं फिर उनका सहायक बनाया गया है।

-जिपं अध्यक्ष के चुनाव में कुल 32 मत पड़े, जिसमें एक मत खारिज किया गया। इस मतपत्र पर निर्धारित तरीके से मतदान नहीं हुआ था, मतदान के लिए प्रत्याशी के नाम के समक्ष अंक से अपनी मत प्राथमिकता दर्शानी होती है जो कि गलत कर दी गई थी। इस कारण एक मत खारिज हुआ।
-रविंद्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी
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