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Rampur News: साक्ष्य के अभाव में कार लूट व चालक की हत्या के दो आरोपी बरी
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रामपुर। कार चालक की हत्या कर कार लूटकर फरार होने के मामले में दो आरोपियों को कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दोनों को बरी कर दिया। मामला अजीमनगर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
अजीमनगर थाना क्षेत्र के पसियापुर गांव निवासी चौकीदार सुशील ने 27 फरवरी 2016 को पुलिस को सूचना दी कि करनपुर बस अड्डे के पास खेत में एक लाश पड़ी है। सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। जांच के दौरान मृतक की पहचान संभल के रहरैट गांव निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई।
पुलिस जांच में सामने आया कि मझरा इमरता गांव के अरुण कुमार और जसविंदर ने मुरादाबाद से एक किराये की कार बुक कराई थी, जिसे मनोज चला रहा था। तफ्तीश में यह भी सामने आया कि दोनों ने मिलकर कार लूट ली और विरोध करने पर मनोज की हत्या कर शव फेंक दिया। पुलिस ने बाद में कार भी बरामद कर ली थी और दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सचिन अग्रवाल ने पैरवी करते हुए दोनों आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अभियोजन आरोपियों के खिलाफ कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर कोर्ट ने इमरता मझरा गांव निवासी अरुण व जसविंदर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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गला दबाकर की गई थी हत्या
रामपुर। अधिवक्ता सचिन अग्रवाल के अनुसार मनोज की हत्या गला दबाकर की गई थी और शव को फेंक दिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर मारने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अभियोजन इसको लेकर साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अभियोजन की ओर से पेश किए 13 गवाह
रामपुर। संभल के चालक की कार लूटकर हत्या के मामले में अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, लेकिन इसके बाद भी अभियोजन केस साबित करने में नाकाम रहा।
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अजीमनगर थाना क्षेत्र के पसियापुर गांव निवासी चौकीदार सुशील ने 27 फरवरी 2016 को पुलिस को सूचना दी कि करनपुर बस अड्डे के पास खेत में एक लाश पड़ी है। सूचना पर पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। जांच के दौरान मृतक की पहचान संभल के रहरैट गांव निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई।
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पुलिस जांच में सामने आया कि मझरा इमरता गांव के अरुण कुमार और जसविंदर ने मुरादाबाद से एक किराये की कार बुक कराई थी, जिसे मनोज चला रहा था। तफ्तीश में यह भी सामने आया कि दोनों ने मिलकर कार लूट ली और विरोध करने पर मनोज की हत्या कर शव फेंक दिया। पुलिस ने बाद में कार भी बरामद कर ली थी और दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सचिन अग्रवाल ने पैरवी करते हुए दोनों आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अभियोजन आरोपियों के खिलाफ कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस पर कोर्ट ने इमरता मझरा गांव निवासी अरुण व जसविंदर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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गला दबाकर की गई थी हत्या
रामपुर। अधिवक्ता सचिन अग्रवाल के अनुसार मनोज की हत्या गला दबाकर की गई थी और शव को फेंक दिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर मारने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अभियोजन इसको लेकर साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
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अभियोजन की ओर से पेश किए 13 गवाह
रामपुर। संभल के चालक की कार लूटकर हत्या के मामले में अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, लेकिन इसके बाद भी अभियोजन केस साबित करने में नाकाम रहा।