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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही स्वार में हो सकेगा उप चुनाव
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रामपुर। स्वार विधानसभा सीट पर उप चुनाव सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही हो सकेगा। क्योंकि उम्र विवाद से संबंधित हाईकोर्ट के फैसले को अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट मेें चुनौती दी है। यह याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसी वजह से चुनाव आयोग ने स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए जाने का एलान नहीं किया है।
2017 के विधानसभा चुनाव में स्वार-टांडा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम निर्वाचित हुए थे। उन्होंने जब अपना नामांकन दाखिल किया तो उनके मुकाबले चुनाव लड़ने वाले नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनकी उम्र पर सवाल उठाते हुए रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष आपत्ति दायर की थी। उनके द्वारा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दिए जाने की वजह से यह आपत्ति खारिज कर दी गई थी। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर अब्दुल्ला के निर्वाचन को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अपने फैसले में अब्दुल्ला के निर्वाचन को रद्द घोषित कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि नामांकन के वक्त अब्दुल्ला आजम न्यूनतम उम्र की शर्त को पूरा नहीं कर रहे थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्टे ना देते हुए याचिका के अंतिम निस्तारण के लिए 25 मार्च की तिथि नियत की थी, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से नियत तिथि पर सुनवाई नहीं हो सकी। तब से यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ी हुई है।
इस बीच विधानसभा सचिवालय ने हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर स्वार विधानसभा की सीट को 16 दिसंबर से रिक्त घोषित कर दिया था। इस सीट पर उप चुनाव कराए जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। बसपा और कांग्रेस ने स्वार सीट पर उप चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी थी। लेकिन केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने यूपी आठ सीटों में से इस सीट पर उप चुनाव की घोषणा नहीं की। वजह यह बताई गई कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने की वजह से उप चुनाव का एलान नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के निस्तारण के बाद ही इस सीट पर उप चुनाव की संभावना है।
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2017 के विधानसभा चुनाव में स्वार-टांडा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम निर्वाचित हुए थे। उन्होंने जब अपना नामांकन दाखिल किया तो उनके मुकाबले चुनाव लड़ने वाले नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनकी उम्र पर सवाल उठाते हुए रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष आपत्ति दायर की थी। उनके द्वारा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दिए जाने की वजह से यह आपत्ति खारिज कर दी गई थी। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर अब्दुल्ला के निर्वाचन को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अपने फैसले में अब्दुल्ला के निर्वाचन को रद्द घोषित कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि नामांकन के वक्त अब्दुल्ला आजम न्यूनतम उम्र की शर्त को पूरा नहीं कर रहे थे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्टे ना देते हुए याचिका के अंतिम निस्तारण के लिए 25 मार्च की तिथि नियत की थी, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से नियत तिथि पर सुनवाई नहीं हो सकी। तब से यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ी हुई है।
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इस बीच विधानसभा सचिवालय ने हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर स्वार विधानसभा की सीट को 16 दिसंबर से रिक्त घोषित कर दिया था। इस सीट पर उप चुनाव कराए जाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। बसपा और कांग्रेस ने स्वार सीट पर उप चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी थी। लेकिन केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने यूपी आठ सीटों में से इस सीट पर उप चुनाव की घोषणा नहीं की। वजह यह बताई गई कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होने की वजह से उप चुनाव का एलान नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका के निस्तारण के बाद ही इस सीट पर उप चुनाव की संभावना है।
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