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गन्ना किसानों को अब खतौनी नहीं करनी होगी अपलोड
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रामपुर। गन्ना किसानों द्वारा ऑनलाइन घोषणा पत्र भरे जाने की प्रक्रिया को विभाग ने सरल कर दिया है। अब गन्ना किसानों को ऑनलाइन घोषणा पत्र भरते समय खतौनी अपलोड करना अनिवार्य नहीं होगा।
जिले में इन दिनों गन्ना किसानों द्वारा अगले सत्र में गन्ना केंद्रों पर तौल के लिए ऑनलाइन घोषणा पत्र भरे जा रहे हैं। जिले में करीब साढ़े चौतीस हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा है और करीब 45 हजार गन्ना उत्पादक किसान हैं। इन किसानों को ऑनलाइन खतौनी अपलोड करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्वर की दिक्कत और अन्य वजहों से किसान खतौनी अपलोड नहीं कर पा रहे थे। जिस पर अब गन्ना विभाग ने किसानों के ऑनलाइन घोषणा पत्र के साथ खतौनी अपलोड करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह ने बताया कि किसानों ने खतौनी अपलोड न करने का सुझाव दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान सॉफ्टवेयर पर आने वाले कठिन और अंग्रेजी शब्दों के स्थान पर हिंदी व आम बोलचाल वाले शब्दों का प्रयोग कर दिया गया है। जिसमें ऑटम के स्थान पर शरदकालीन, शेयर प्रतिशत के स्थान पर कृषक अंश, गन्ना जाति के स्थान पर गन्ना किस्म, खसरा संख्या के स्थान पर खतौनी खाता संख्या आदि सामान्य बोलचाल के शब्द शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन घोषणा पत्र भरने के समय एक से अधिक ग्राम दर्ज करने की व्यवस्था भी प्रदान की जा रही है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि राणा शुगर मिल व त्रिवेणी शुगर मिल द्वारा सभी किसानों का पूर्ण गन्ना भुगतान कर दिया गया है।
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जिले में इन दिनों गन्ना किसानों द्वारा अगले सत्र में गन्ना केंद्रों पर तौल के लिए ऑनलाइन घोषणा पत्र भरे जा रहे हैं। जिले में करीब साढ़े चौतीस हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा है और करीब 45 हजार गन्ना उत्पादक किसान हैं। इन किसानों को ऑनलाइन खतौनी अपलोड करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्वर की दिक्कत और अन्य वजहों से किसान खतौनी अपलोड नहीं कर पा रहे थे। जिस पर अब गन्ना विभाग ने किसानों के ऑनलाइन घोषणा पत्र के साथ खतौनी अपलोड करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
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जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह ने बताया कि किसानों ने खतौनी अपलोड न करने का सुझाव दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इसके साथ ही ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान सॉफ्टवेयर पर आने वाले कठिन और अंग्रेजी शब्दों के स्थान पर हिंदी व आम बोलचाल वाले शब्दों का प्रयोग कर दिया गया है। जिसमें ऑटम के स्थान पर शरदकालीन, शेयर प्रतिशत के स्थान पर कृषक अंश, गन्ना जाति के स्थान पर गन्ना किस्म, खसरा संख्या के स्थान पर खतौनी खाता संख्या आदि सामान्य बोलचाल के शब्द शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन घोषणा पत्र भरने के समय एक से अधिक ग्राम दर्ज करने की व्यवस्था भी प्रदान की जा रही है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि राणा शुगर मिल व त्रिवेणी शुगर मिल द्वारा सभी किसानों का पूर्ण गन्ना भुगतान कर दिया गया है।
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