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स्कूली बच्चों को रामपुर के उत्पादों से कराया जाएगा अवगत
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रामपुर। जिले के स्थानीय उत्पादों की विशेषता से स्कूली बच्चों को अवगत कराया जाएगा। बच्चों को इन उत्पादों से जुड़ने और उसे तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसे लेकर जिलाधिकारी जल्द ही सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक करेंगे। उनकी योजना है कि वोकल फॉर लोकल योजना से बच्चों को भी जोड़ा जाए। सप्ताह में कम से एक पीरियड में बच्चों को रामपुर के उत्पादों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने आन्जनेय कुमार सिंह रामपुर के स्थानीय उत्पादों वायलिन, टोपी, जरी-जरदोजी, पतंग और पतंगबाजी को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की योजना पर काम कर रहे हैं। जरी जरदोजी तो एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत भी शामिल है। अन्य उत्पादों खास तौर पर वायलिन और टोपी के बारे में बच्चों को बताना चाहते हैं। उनकी कोशिश है कि स्कूलों में बच्चों को वायलिन बजाने का प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि रामपुर के वायलिन की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी रामपुर के वायलिन की सराहना की थी और उस वक्त उनको रामपुर का वायलिन भी भेंट किया गया था।
जिलाधिकारी ने बताया कि अपनी कला और संस्कृति से जुड़ना अच्छी बात है। रामपुर के बच्चों को यह पता होना चाहिए रामपुर की पहचान क्या है। रामपुर के स्थानीय उत्पादों के बारे में अवगत कराने के लिए स्कूलों में वोकेशनल एजूकेशन के तहत ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें बच्चों को इस उत्पाद के बारे में बताया जाएगा। साथ ही अगर कोई इससे जुड़ना चाहेगा तो उसे प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसे लेकर वो जल्द ही सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक करेंगे। कोरोना संक्रमण की वजह से अभी स्कूल पूरी तरह से नहीं खुले हैं। स्थिति सामान्य होने पर जब स्कूल खुलेंगे तो सप्ताह में एक दिन बच्चों को स्थानीय उत्पादों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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जिलाधिकारी ने आन्जनेय कुमार सिंह रामपुर के स्थानीय उत्पादों वायलिन, टोपी, जरी-जरदोजी, पतंग और पतंगबाजी को उसकी पुरानी पहचान दिलाने की योजना पर काम कर रहे हैं। जरी जरदोजी तो एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत भी शामिल है। अन्य उत्पादों खास तौर पर वायलिन और टोपी के बारे में बच्चों को बताना चाहते हैं। उनकी कोशिश है कि स्कूलों में बच्चों को वायलिन बजाने का प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने बताया कि रामपुर के वायलिन की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी रामपुर के वायलिन की सराहना की थी और उस वक्त उनको रामपुर का वायलिन भी भेंट किया गया था।
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जिलाधिकारी ने बताया कि अपनी कला और संस्कृति से जुड़ना अच्छी बात है। रामपुर के बच्चों को यह पता होना चाहिए रामपुर की पहचान क्या है। रामपुर के स्थानीय उत्पादों के बारे में अवगत कराने के लिए स्कूलों में वोकेशनल एजूकेशन के तहत ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें बच्चों को इस उत्पाद के बारे में बताया जाएगा। साथ ही अगर कोई इससे जुड़ना चाहेगा तो उसे प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसे लेकर वो जल्द ही सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक करेंगे। कोरोना संक्रमण की वजह से अभी स्कूल पूरी तरह से नहीं खुले हैं। स्थिति सामान्य होने पर जब स्कूल खुलेंगे तो सप्ताह में एक दिन बच्चों को स्थानीय उत्पादों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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