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मुकदमों ने मुझे तोड़ा, वजन 22 किलो घट गया है: आजम
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रामपुर। सांसद आजम ने कहा है कि वह मुकदमों और पुलिस की जांच की वजह से टूट गए हैं। उनका वजन 22 किलो तक कम हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर सौ साल के दरख़्त पर डकैती की तफसील के सौ नोटिस चस्पा कर दोगे दरख़्त सूख कर गिर जाएगा। मुझसे महिला थाने में सवाल पूछा जा रहा है कि हिन्दुस्तान से बाहर आपकी कितनी संपत्ति है। लोकसभा के चुनाव में जीत का हिसाब अभी तक नहीं दे पाया हूं, विधानसभा के उप चुनाव के बाद पता नहीं क्या हो।
आजम खां शनिवार की रात मोहल्ला खजान खां के कुआं में एक जलसे को संबोधित हो गए। जलसे को संबोधित करते हुए आजम खां भावुक हो गए। अपनी आंख के आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा कि जिसे तुम अपना आईडियल मानते हो वह चोर है, डाकू है। बताओ इस एहसास को लेकर कोई खुद्दार ग़ैरतदार इंसान जिंदा रह सकता है, मगर मैं जिंदा हूँ। मैं अपराधी हूं, मुजरिम हूं। इसलिए मुजरिम हूं कि मैं आपका वकील हूं। मैं आपकी खुशियां चाहता हूं। बोले मामूली सफर नहीं है मेरी जिंदगी का। इतना लंबा सफर गुजारने के बाद तुम्हारा यह साथी एक किलो वजन बढ़ाकर नहीं 22 किलो घटाकर तुम्हारे सामने खड़ा है।
रोते हुए कहा मैं तो यह समझता था कि हिंदुस्तान के करोड़ों लोग मुझे एक अच्छे सियासतदां और एक अच्छे इंसान के तौर पर जानते हैं। बहुत कम उम्र से यहां तक का सफर जिसमें मैंने मलियाना, हैदराबाद का रंग,कैराना और मुरादाबाद की ईदगाह का रंग देखा है। मैंने लाखों लरजते हुए लोगो का खून सड़कों पर गिरते पानी से भी सस्ते बहते देखा है। मेरी सियासी जिंदगी का सफर जिंदाबाद के नारों से शुरू नहीं हुआ था। मेरा सफर मजलूम और कमजोरों की लड़ाई से शुरु हुआ था। मामूली सफर नहीं है मेरी जिंदगी का। आजम खां ने कहा कि मैंने आपके शहर को इस उत्तर प्रदेश को आपके मामलात को,आपका तीन तलाक़ का मसला हो अयोध्या राम जन्म भूमि हो क़ानूनी शरीयत हो मैंने यही तो कहा यह जाती मामला है यह आपसी लड़ाई का नहीं अदालत के फैसले का इंतेजार करो और क्या कहा यही लड़ाई तो लड़ी आपकी उसी की तो सजा है यह। क्यों हार गया वो जिसने दौलत के अम्बार लगा दिए यहां पर। इस मौके पर राज्यसभा सदस्य डॉ. तजीन फात्मा, विधायक अब्दुल्ला आजम, आसिम राजा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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आजम खां शनिवार की रात मोहल्ला खजान खां के कुआं में एक जलसे को संबोधित हो गए। जलसे को संबोधित करते हुए आजम खां भावुक हो गए। अपनी आंख के आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा कि जिसे तुम अपना आईडियल मानते हो वह चोर है, डाकू है। बताओ इस एहसास को लेकर कोई खुद्दार ग़ैरतदार इंसान जिंदा रह सकता है, मगर मैं जिंदा हूँ। मैं अपराधी हूं, मुजरिम हूं। इसलिए मुजरिम हूं कि मैं आपका वकील हूं। मैं आपकी खुशियां चाहता हूं। बोले मामूली सफर नहीं है मेरी जिंदगी का। इतना लंबा सफर गुजारने के बाद तुम्हारा यह साथी एक किलो वजन बढ़ाकर नहीं 22 किलो घटाकर तुम्हारे सामने खड़ा है।
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रोते हुए कहा मैं तो यह समझता था कि हिंदुस्तान के करोड़ों लोग मुझे एक अच्छे सियासतदां और एक अच्छे इंसान के तौर पर जानते हैं। बहुत कम उम्र से यहां तक का सफर जिसमें मैंने मलियाना, हैदराबाद का रंग,कैराना और मुरादाबाद की ईदगाह का रंग देखा है। मैंने लाखों लरजते हुए लोगो का खून सड़कों पर गिरते पानी से भी सस्ते बहते देखा है। मेरी सियासी जिंदगी का सफर जिंदाबाद के नारों से शुरू नहीं हुआ था। मेरा सफर मजलूम और कमजोरों की लड़ाई से शुरु हुआ था। मामूली सफर नहीं है मेरी जिंदगी का। आजम खां ने कहा कि मैंने आपके शहर को इस उत्तर प्रदेश को आपके मामलात को,आपका तीन तलाक़ का मसला हो अयोध्या राम जन्म भूमि हो क़ानूनी शरीयत हो मैंने यही तो कहा यह जाती मामला है यह आपसी लड़ाई का नहीं अदालत के फैसले का इंतेजार करो और क्या कहा यही लड़ाई तो लड़ी आपकी उसी की तो सजा है यह। क्यों हार गया वो जिसने दौलत के अम्बार लगा दिए यहां पर। इस मौके पर राज्यसभा सदस्य डॉ. तजीन फात्मा, विधायक अब्दुल्ला आजम, आसिम राजा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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