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नवरात्र: छठे दिन मां कात्यायनी माता की हुई पूजा-अर्चना
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रामपुर। रविवार से शुरू हुए शारदीय नवरात्र में छठे दिन श्रद्धालुओं ने माता के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की। मां से रिद्धि-सिद्धि का वर मांगा। इसके साथ ही घर व मंदिरों में छंद भी गाए। घरों में श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ किया।
नवरात्र के छइे दिन शुक्रवार को सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। माता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक व कपूर की बाती प्रज्ज्वलित की और लौंग, मिष्ठान, मेवा, फल, पुष्प अर्पित किए। माता को लाल चुनरी ओड़ाई और श्रंगार का सामान अर्पित कर मां दुर्गा की आरती और चालीसा का पाठ किया। घरों पर भी श्रद्धालुओं ने पूजन किया और फल, मेवे आदि का भोग लगाकर अज्ञारी पूजन किया। मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करते हुए साधकों ने गुड़-चना और शहद का भोग भी लगाया। दोपहर में माता के छंद गाए।
पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्यायन ऋषि के घर कन्या के रूप में जन्म लेने के कारण मां का नाम कात्यायनी पड़ा। कात्यायनी मां ने ही अजन्मा रूप छोड़कर पहली बार कन्या के रूप में जन्म लिया। कुंवारी कन्याओं की विवाह की मनोकामना मां कात्यायनी की अराधना करने से शीघ्र पूरी होती है। नगर स्थित श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, अग्रवाल धर्मशाला स्थित महालक्ष्मी मंदिर, कृष्णा विहार स्थित मनोकामना मंदिर, सिविल लाइंस स्थित प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, श्री हरिहर मंदिर समेत सभी मंदिरों में सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने घर में पूजा के साथ-साथ श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ भी किया।
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नवरात्र के छइे दिन शुक्रवार को सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। माता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक व कपूर की बाती प्रज्ज्वलित की और लौंग, मिष्ठान, मेवा, फल, पुष्प अर्पित किए। माता को लाल चुनरी ओड़ाई और श्रंगार का सामान अर्पित कर मां दुर्गा की आरती और चालीसा का पाठ किया। घरों पर भी श्रद्धालुओं ने पूजन किया और फल, मेवे आदि का भोग लगाकर अज्ञारी पूजन किया। मां के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करते हुए साधकों ने गुड़-चना और शहद का भोग भी लगाया। दोपहर में माता के छंद गाए।
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पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्यायन ऋषि के घर कन्या के रूप में जन्म लेने के कारण मां का नाम कात्यायनी पड़ा। कात्यायनी मां ने ही अजन्मा रूप छोड़कर पहली बार कन्या के रूप में जन्म लिया। कुंवारी कन्याओं की विवाह की मनोकामना मां कात्यायनी की अराधना करने से शीघ्र पूरी होती है। नगर स्थित श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, अग्रवाल धर्मशाला स्थित महालक्ष्मी मंदिर, कृष्णा विहार स्थित मनोकामना मंदिर, सिविल लाइंस स्थित प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, श्री हरिहर मंदिर समेत सभी मंदिरों में सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने घर में पूजा के साथ-साथ श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ भी किया।
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