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बुरी शक्तियों के नाश का वरदान मांगा
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Tue, 20 Oct 2015 11:26 PM IST
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नवरात्र में मंगलवार को माता के अनंत स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने रात्रि जागरण कर मां की आराधना की। तिलों से पूजा कर मां से बुरी शक्तियों के नाश का वरदान मांगा। भक्तों ने मां की स्तुति के लिए मंत्रों का जाप किया। शारदीय नवरात्र में मंगलवार को मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप का पूजन हुआ।
भक्तों ने घर पर पूजन के बाद मंदिर पहुंच कर लौंग, कपूर, पुष्प, तिल, फल, नारियल आदि से माता की विधिवत पूजा अर्चना की। सुबह और शाम को मंदिरों में देवी भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। रात में भक्तों ने अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजा और जप-तप कर माता को प्रसन्न किया।
पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि देवी भगवती का यह सातवां स्वरूप अनंत है। काल को जीतने वाली मां काली देवियों की केंद्रीय सत्ता हैं। माता ने चंड-मुंड, रक्तबीज समेत कई असुरों का नाश किया और रुद्राणी बनकर भक्तों का कल्याण किया। भगवान शिव की ओर से माता को काली कहे जाने के बाद माता का यह नाम पड़ा।
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मां काली को प्रसन्न करने के लिए भक्तों ने अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजा की। इसके साथ ही रात्रि जागरण कर मां का जप किया। शहर के माई का थान, श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, मंदिर वाली गली स्थित मंदिर समेत सभी मंदिरों में सुबह-शाम पूजा-अर्चना के साथ दोपहर बाद माता के छंद गाए गए।
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भक्तों ने घर पर पूजन के बाद मंदिर पहुंच कर लौंग, कपूर, पुष्प, तिल, फल, नारियल आदि से माता की विधिवत पूजा अर्चना की। सुबह और शाम को मंदिरों में देवी भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। रात में भक्तों ने अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजा और जप-तप कर माता को प्रसन्न किया।
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पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि देवी भगवती का यह सातवां स्वरूप अनंत है। काल को जीतने वाली मां काली देवियों की केंद्रीय सत्ता हैं। माता ने चंड-मुंड, रक्तबीज समेत कई असुरों का नाश किया और रुद्राणी बनकर भक्तों का कल्याण किया। भगवान शिव की ओर से माता को काली कहे जाने के बाद माता का यह नाम पड़ा।
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मां काली को प्रसन्न करने के लिए भक्तों ने अखंड ज्योति जलाकर काले तिलों से पूजा की। इसके साथ ही रात्रि जागरण कर मां का जप किया। शहर के माई का थान, श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, मंदिर वाली गली स्थित मंदिर समेत सभी मंदिरों में सुबह-शाम पूजा-अर्चना के साथ दोपहर बाद माता के छंद गाए गए।