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जलाभिषेक करने शिवालयों में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब
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रामपुर। सावन के दूसरे सोमवार पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं और शिवभक्त कांवड़ियों ने शिवालयों में जलाभिषेक किया। शिवालयों में दोपहर बाद तक लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। हर-हर, बम-बम के उद्घोष से मंदिर दिन भर गूंजते रहे।
सावन माह के दूसरे सोमवार पर भी श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का जलाभिषेक कर मनौतियां मांगीं। दिनभर मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। भमरौआ स्थित प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, पंजाबनगर स्थित श्री ओम नागेश्वर महादेव मंदिर, रठौंडा स्थित श्री वामेश्वर महादेव मंदिर समेत जिले भर के अन्य प्राचीन व शिव मंदिरों में तड़के चार बजे से ही जलाभिषेक करना शुरू कर दिया था। सुबह से ही शिवभक्तों की कतार मंदिर से बाहर तक लग गई। हरिद्वार और ब्रजघाट से कांवड़ में जल लेकर पैदल पहुंचे कांवड़ियों की भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ी। शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, पुष्प, भांग, धतूरा, शहद, फल और प्रसाद अर्पित कर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। भमरौआ और रठौंडा समेत अन्य कई शिव मंदिरों में सोमवार को भंडारे का भी आयोजन हुआ जिनमें रात तक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते रहे। इसके साथ महिला व बच्चों ने मेले में भी खरीदारी की।
शहर के मंदिरों में शिव का जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। अजीतपुर स्थित शिव मंदिर, कृष्णा विहार स्थित शिव मंदिर, हाईवे स्थित शिव साईं मंदिर, खारीं कुंआ स्थित शिव मंदिर, जोकीराम की बगिया स्थित मंदिर, पुराना गंज स्थित माईं के थान, मुनीश्वर दत्त का मंदिर, पुराना गंज स्थित हरिहर मंदिर, मिस्टन गंज स्थित प्राचीन राधा कृष्णा मंदिर, न्यू आवास विकास कालोनी स्थित नर्मदेश्वर मंदिर, पुरानी आवास विकास शिव मंदिर, चीनी मिल गेट स्थित मनोकामना मंदिर, जिला पंचायत मार्ग स्थित शिव मंदिर समेत शहर के सभी मंदिरों में जलाभिषेक किया गया। दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। शाम को महिलाओं ने भजन गाए।
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दिनभर चढ़ती रहीं डाक कांवड़ें
रामपुर। तमाम श्रद्धालु डाक कांवड़ लेकर भमरौआ और पंजाबनगर मंदिर में ब्रह्म मुहुर्त से पहुंचने शुरु हो गए थे। रविवार को हरिद्वार और ब्रजघाट से कांवड़ में जल भरकर कांवड़िये जल लेकर दौड़ते हुए मंदिर तक पहुंचते रहे। डाक कांवड़ लेकर पहुंचे कांवड़ियों को अन्य श्रद्धालुओं ने पहले जलाभिषेक के लिए स्थान दिया। विधि विधान से पूजा अर्चना कर भोलेनाथ से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। डाक कांवड़ यात्रा पूरी होने पर कांवड़ियों के समूह भोले की मस्ती में जमकर नृत्य करते रहे। महिलाओं और किशोरों ने भी बैकुंठ कांवड़ लाकर जलाभिषेक किया।
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सावन माह के दूसरे सोमवार पर भी श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का जलाभिषेक कर मनौतियां मांगीं। दिनभर मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। भमरौआ स्थित प्राचीन श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, पंजाबनगर स्थित श्री ओम नागेश्वर महादेव मंदिर, रठौंडा स्थित श्री वामेश्वर महादेव मंदिर समेत जिले भर के अन्य प्राचीन व शिव मंदिरों में तड़के चार बजे से ही जलाभिषेक करना शुरू कर दिया था। सुबह से ही शिवभक्तों की कतार मंदिर से बाहर तक लग गई। हरिद्वार और ब्रजघाट से कांवड़ में जल लेकर पैदल पहुंचे कांवड़ियों की भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ी। शिवभक्तों ने गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, पुष्प, भांग, धतूरा, शहद, फल और प्रसाद अर्पित कर शिवलिंग का जलाभिषेक किया। भमरौआ और रठौंडा समेत अन्य कई शिव मंदिरों में सोमवार को भंडारे का भी आयोजन हुआ जिनमें रात तक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते रहे। इसके साथ महिला व बच्चों ने मेले में भी खरीदारी की।
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शहर के मंदिरों में शिव का जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। अजीतपुर स्थित शिव मंदिर, कृष्णा विहार स्थित शिव मंदिर, हाईवे स्थित शिव साईं मंदिर, खारीं कुंआ स्थित शिव मंदिर, जोकीराम की बगिया स्थित मंदिर, पुराना गंज स्थित माईं के थान, मुनीश्वर दत्त का मंदिर, पुराना गंज स्थित हरिहर मंदिर, मिस्टन गंज स्थित प्राचीन राधा कृष्णा मंदिर, न्यू आवास विकास कालोनी स्थित नर्मदेश्वर मंदिर, पुरानी आवास विकास शिव मंदिर, चीनी मिल गेट स्थित मनोकामना मंदिर, जिला पंचायत मार्ग स्थित शिव मंदिर समेत शहर के सभी मंदिरों में जलाभिषेक किया गया। दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। शाम को महिलाओं ने भजन गाए।
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दिनभर चढ़ती रहीं डाक कांवड़ें
रामपुर। तमाम श्रद्धालु डाक कांवड़ लेकर भमरौआ और पंजाबनगर मंदिर में ब्रह्म मुहुर्त से पहुंचने शुरु हो गए थे। रविवार को हरिद्वार और ब्रजघाट से कांवड़ में जल भरकर कांवड़िये जल लेकर दौड़ते हुए मंदिर तक पहुंचते रहे। डाक कांवड़ लेकर पहुंचे कांवड़ियों को अन्य श्रद्धालुओं ने पहले जलाभिषेक के लिए स्थान दिया। विधि विधान से पूजा अर्चना कर भोलेनाथ से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की। डाक कांवड़ यात्रा पूरी होने पर कांवड़ियों के समूह भोले की मस्ती में जमकर नृत्य करते रहे। महिलाओं और किशोरों ने भी बैकुंठ कांवड़ लाकर जलाभिषेक किया।