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श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी दिवस पर रागी जत्थों ने सबद कीर्तन कर किया निहाल
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रामपुर। गुरु अर्जुन देव के शहीदी दिवस पर रागी जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल कर दिया। गुरु अर्जुन देव के जीवन से प्रेरणा लेकर श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। जो बोले सो निहाल और वाहे गुरु का खालसा वाहे गुरु की फतह के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।
शुक्रवार को सुबह से ही गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में शहीदी पर्व मनाने की तैयारियां शुरूहो गई थीं। सुबह करीब पांच बजे दीवान का शुभारंभ नितनेम पाठ के साथ हुआ। इसके बाद श्री सुखमनी साहिब का पाठ हुआ। भाई कौशेंद्र सिंह व महिलाओं के नाम सिमरन जत्थे ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल कर दिया। इसके बाद श्री सहेज पाठ की लड़ीवार समाप्ति हुई। जालंधर से आए रागी जत्था भाई अमृतपाल सिंह के रागी जत्थे ने कीर्तन कर संगत को गुरु साहिब की वाणी से जोड़ा। रात को भारी दीवान सजाया गया, जिसमें भाई अमृतपाल सिंह के रागी जत्थों के अलावा स्थानीय रागी जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। देर रात दीवान की समाप्ति पर अरदास हुई। इसके बाद गुरु का लंगर बरताया गया, जिसमें प्रसाद ग्रहण करने भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस मौके पर गुरुद्वारे के प्रधान गुरुजीत सिंह, इंद्रजीत सिंह चिटकारा, हरबंस सिंह, हरपाल सिंह, नानक सिंह, मंजीत सिंह, गुरमीत सिंह, तपिंदर सिंह, गुरमीत सिंह, प्रीतम सिंह, जगजीत सिंह, निरवैर सिंह, अमरदीप सिंह, अवतार सिंह, चरण कौर, स्वर्ण कौर, जसपाल कौर आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को सुबह से ही गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में शहीदी पर्व मनाने की तैयारियां शुरूहो गई थीं। सुबह करीब पांच बजे दीवान का शुभारंभ नितनेम पाठ के साथ हुआ। इसके बाद श्री सुखमनी साहिब का पाठ हुआ। भाई कौशेंद्र सिंह व महिलाओं के नाम सिमरन जत्थे ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल कर दिया। इसके बाद श्री सहेज पाठ की लड़ीवार समाप्ति हुई। जालंधर से आए रागी जत्था भाई अमृतपाल सिंह के रागी जत्थे ने कीर्तन कर संगत को गुरु साहिब की वाणी से जोड़ा। रात को भारी दीवान सजाया गया, जिसमें भाई अमृतपाल सिंह के रागी जत्थों के अलावा स्थानीय रागी जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया। देर रात दीवान की समाप्ति पर अरदास हुई। इसके बाद गुरु का लंगर बरताया गया, जिसमें प्रसाद ग्रहण करने भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस मौके पर गुरुद्वारे के प्रधान गुरुजीत सिंह, इंद्रजीत सिंह चिटकारा, हरबंस सिंह, हरपाल सिंह, नानक सिंह, मंजीत सिंह, गुरमीत सिंह, तपिंदर सिंह, गुरमीत सिंह, प्रीतम सिंह, जगजीत सिंह, निरवैर सिंह, अमरदीप सिंह, अवतार सिंह, चरण कौर, स्वर्ण कौर, जसपाल कौर आदि मौजूद रहे।
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