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एक साल बाद भी लालपुर बैराज के रिवाइज इस्टीमेट को नहीं मिल सकी मंजूरी
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रामपुर। भूगर्भ जलस्तर सुधारने एवं नहरों के जरिए फसलों की सिंचाई के लिए 2013 में मंजूर हुआ कोसी नदी पर बैराज का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसे शुरू कराने के लिए अब सिंचाई विभाग ने रिवाइज एस्टीमेट तैयार कर पिछले साल अगस्त में शासन को भेजा था, लेकिन इस एस्टीमेट को भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। हालांकि, विभागीय अफसरों का दावा है कि जल्द ही रिवाइज एस्टीमेट को मंजूरी मिल जाएगी।
प्रदेश सरकार ने अक्तूबर 2013 को लालपुर स्थिति कोसी नदी पर बैराज के निर्माण को मंजूरी दी थी। उस समय यह प्रोजेक्ट 216.35 करोड़ रुपये का मंजूर हुआ था, जिसे मार्च 2018 तक पूरा किया जाना था। इसके लिए सपा सरकार ने 2014 में 14 करोड़ और 2015 में 30 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, जिसके बाद तेजी से काम शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था ने आवश्यक निर्माण सामग्री जुटाने के साथ ही, मशीनरी एवं टूल्स आदि जुटा लिए, जिसके बाद बैचिंग प्लांट स्थापित कर दिया गया था। कार्य स्थल पर बैराज निर्माण के लिए फाउंडेशन की खोदाई, डाइवर्जन बंध का निर्माण तथा डिवाटरिंग आदि कार्य ही हो सका था। इस बीच सूबे में सत्ता परिवर्तन हो गया।
2017 में कोसी नदी पर बन रहा बैराज भी अटक गया था। तब से ही यह काम बंद है और बैराज अधर में लटका हुआ है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से इस बावत नए सिरे से एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था, जो 595 करोड़ का है। ऐसे में छह साल में ही प्रोजेक्ट की लागत 379 करोड़ रुपये बढ़ गई थी, लेकिन रिवाइज एस्टीमेट को भेजे हुए भी एक साल बीत चुका है, अब तक प्रोजेक्ट मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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प्रदेश सरकार ने अक्तूबर 2013 को लालपुर स्थिति कोसी नदी पर बैराज के निर्माण को मंजूरी दी थी। उस समय यह प्रोजेक्ट 216.35 करोड़ रुपये का मंजूर हुआ था, जिसे मार्च 2018 तक पूरा किया जाना था। इसके लिए सपा सरकार ने 2014 में 14 करोड़ और 2015 में 30 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे, जिसके बाद तेजी से काम शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था ने आवश्यक निर्माण सामग्री जुटाने के साथ ही, मशीनरी एवं टूल्स आदि जुटा लिए, जिसके बाद बैचिंग प्लांट स्थापित कर दिया गया था। कार्य स्थल पर बैराज निर्माण के लिए फाउंडेशन की खोदाई, डाइवर्जन बंध का निर्माण तथा डिवाटरिंग आदि कार्य ही हो सका था। इस बीच सूबे में सत्ता परिवर्तन हो गया।
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2017 में कोसी नदी पर बन रहा बैराज भी अटक गया था। तब से ही यह काम बंद है और बैराज अधर में लटका हुआ है। हालांकि, सिंचाई विभाग की ओर से इस बावत नए सिरे से एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था, जो 595 करोड़ का है। ऐसे में छह साल में ही प्रोजेक्ट की लागत 379 करोड़ रुपये बढ़ गई थी, लेकिन रिवाइज एस्टीमेट को भेजे हुए भी एक साल बीत चुका है, अब तक प्रोजेक्ट मंजूरी नहीं मिल सकी है।
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