Rampur: सपा नेता आजम खां के लिए मुश्किलों भरा रहा साल 2019, खां फैमिली पर इसी साल दर्ज हुए थे 148 मुकदमे
आजम खां पिछले 45 सालों से सक्रिय राजनीति में हैं। 2017 तक उनके खिलाफ 21 मुकदमे दर्ज थे। इनमें से नौ मुकदमों को सपा की पिछली सरकार में वापस ले लिया गया था। छह मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट और छह में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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सपा नेता आजम खां के लिए 2019 का साल अच्छा नहीं था। 2019 में वो रामपुर संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव जीतने में जरूर कामयाब हुए थे, लेकिन इस साल उनके खिलाफ 70 मुकदमे दर्ज हुए। इसके अलावा उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा के खिलाफ 34 और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम के खिलाफ भी 44 मुकदमे 2019 में दर्ज हुए। आजम और उनके परिवार पर 2019 में 148 मुकदमे दर्ज हुए। जिस मुकदमे में आजम खां को कोर्ट ने तीन साल कैद की सजा सुनाई है वह भी 2019 में ही दर्ज हुआ था।
आजम खां पिछले 45 सालों से सक्रिय राजनीति में हैं। 2017 तक उनके खिलाफ 21 मुकदमे दर्ज थे। इनमें से नौ मुकदमों को सपा की पिछली सरकार में वापस ले लिया गया था। छह मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट और छह में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आजम खां के खिलाफ सबसे अधिक 70 मुकदमे 2019 में दर्ज हुए हैं। 2019 में आजम खां के खिलाफ आलियागंज के किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में 28, आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में 20 और यतीमखाना के लोगों के घर उजाड़ने के आरोप में 12 मुकदमे दर्ज हुए। इसके अलावा शत्रु संपत्ति कीजमीन कब्जाने, सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कब्जा करने, अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के साथ मारपीट और धमकी देने के आरोप में भी अलग-अलग थानों में कई मुकदमे 2019 में दर्ज हुए।
2019 में ही पुलिस ने आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा के खिलाफ 43 और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम के खिलाफ 44 मुकदमे दर्ज किए। 2019 में आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द करने का फैसला हाईकोर्ट ने सुनाया था। 2017 विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला ने स्वार सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। नामांकन के वक्त उनकी उम्र को कम बताते हुए बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला की विधायकी रद्द कर दी थी। अब्दुल्ला ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।