UP: रामपुर में धरना-प्रदर्शन पर प्रशासन ने लगाई रोक, जौहर यूनिवर्सिटी में छात्रों का तीसरे दिन भी आंदोलन जारी
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश के विरोध में छात्रों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। उधर, जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जौहर विवि के छात्रों के धरना-प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने रामपुर जिले में 11 सितंबर तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है। प्रशासन का दावा है कि जनपद में आगामी त्योहारों, धार्मिक आयोजनों व परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए इसे लागू किया गया है। साफ किया गया है कि बिना अनुमति के धरना-प्रदर्शन नहीं किया जाएगा। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम प्रशासन डॉ. नितिन मदान की ओर से जारी आदेश के अनुसार चेहल्लुम, स्वतंत्रता दिवस, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, ईद-ए-मिलाद समेत विभिन्न आयोजनों को देखते हुए बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, जुलूस, रैली, पदयात्रा, जनसभा, नुक्कड़ सभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, घेराव और नारेबाजी पर प्रतिबंध रहेगा।
अनुमति मिलने पर भी निर्धारित स्थान, मार्ग और समय का पालन करना अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन, हर्ष फायरिंग, भड़काऊ भाषण, पुतला दहन, सोशल मीडिया पर अफवाह या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट, बिना अनुमति लाउडस्पीकर का प्रयोग तथा रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर भी रोक लगाई गई है। परीक्षाओं के दौरान परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर दायरे में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, फोटोस्टेट, साइबर कैफे और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक रहेगी।
नकल, अनुचित साधनों के प्रयोग और परीक्षा व्यवस्था में बाधा डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। एडीएम ने कहा कि आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से कैंपस गेट पर बेमियादी धरना दे रहे विद्यार्थियों के बीच सोमवार को मशहूर शायर दिवगंत मुनव्वर राणा की बेटी एवं सपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुमैया राणा भी पहुंच गईं। वह न सिर्फ पूरे दिन धरने पर बैठीं बल्कि चेतावनी भरे लहजे में बोलीं, यदि विश्वविद्यालय की एक ईंट भी खिसकी तो यह कुर्बानी भी याद रखी जाएगी।
धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश शर्मनाक है। यह वह सरकार है जो कोई शिक्षण संस्था तामीर तो नहीं कर सकती लेकिन तोड़ने में सबसे आगे रहती है। विश्वविद्यालय के बच्चे यहां बैठकर यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ न करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। यह सरकार भी इन्हीं बच्चों के अभिभावकों के वोट से बनी है। अब इन्हीं बच्चों की यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने जा रही है। सरकार को जवाब देने के लिए यहां पर यह बच्चे बैठे हैं। सदन में हमारे लोग बोल रहे हैं।
समाजवादी पार्टी पूरी तरह साथ खड़ी है। युवाओं का जज्बा और मिजाज यूनिवर्सिटी को खरोंच नहीं आने देगा, उत्तर प्रदेश सरकार को यह समझ लेना चाहिए। दिल्ली से लेकर रामपुर तक युवाओं में हलचल मची हुई है। अब देश तानाशाही से नहीं संविधान से चलेगा।
आंदोलन जारी रखने का छात्रों का एलान
जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के आदेश के विरोध में छात्रों का आंदोलन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने धरना देकर प्रशासन के फैसले का विरोध किया। धरने में पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां की पत्नी तंजीम फात्मा, समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुमैया राणा सहित कई सपा नेता भी पहुंचे।
आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि ध्वस्तीकरण का आदेश वापस होने तक उनका शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा। इस बीच जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से नियमों का पालन करने की अपील की है।
सोमवार को तीसरे दिन भी छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय गेट पर डटे रहे। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। यदि भवनों को ध्वस्त किया गया तो पढ़ाई, परीक्षाएं और भविष्य प्रभावित होगा।
छात्रों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं तथा किसी भी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के पक्ष में नहीं हैं। छात्र-छात्राओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से वर्तमान विद्यार्थियों के साथ भविष्य में प्रवेश लेने वाले छात्र भी प्रभावित होंगे। उन्होंने प्रशासन से आदेश पर पुनर्विचार कर छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। जिला प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति भीड़ जुटाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि शांति व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलनरत छात्रों से संयम बरतने और कानून हाथ में न लेने की अपील की है। छात्रों से समूह बनाकर इधर-उधर न बैठने तथा केवल विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर ही शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।