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Rampur : सपा नेता यूसुफ मलिक 374 दिन बाद जेल से हुए रिहा, आजम से मिलने पहुंचे उनके घर

Thu, 13 Apr 2023 12:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 13 Apr 2023 12:38 AM IST
सार

रिहा होने के बाद यूसुफ मलिक का समर्थकों ने स्वागत किया। रिहा होने के बाद मलिक आजम खां से मिलने उनके घर गए। 

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Rampur : SP leader Yusuf Malik released from jail after 374 days
समर्थकों के बीच मलिक... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सपा नेता यूसुफ मलिक 374 दिन बाद बुधवार की देर रात रामपुर की जेल से रिहा हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रामपुर की कोर्ट से उनकी रिहाई का परवाना जिला कारागार में भेज दिया गया था। कल रात रिहा होने के बाद यूसुफ मलिक का समर्थकों ने स्वागत किया। रिहा होने के बाद मलिक आजम खां से मिलने उनके घर गए। 

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मुरादाबाद निवासी सपा नेता यूसुफ मलिक के खिलाफ 01 दिसंबर 2019 को रामपुर के अजीमनगर थाने में आलियागंज के किसान पर जानलेवा हमला करने, धमकी देने और बंधक बनाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। यूसुफ मलिक को सपा नेता आजम खां का करीबी माना जाता है। उनके खिलाफ मुरादाबाद में हाउस टैक्स वसूलने गए अधिकारियों को धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। 26 मार्च 2022 को मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाने अपर नगर आयुक्त ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस यूसुफ मलिक के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी और उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई थी। मुरादाबाद पुलिस ने यूसुफ मलिक पर 25 हजार का इनाम भी घोषित किया था। इसके बाद उनके खिलाफ रासुका लगा कार्रवाई की गई थी।
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मुरादाबाद में मुकदमे दर्ज होने के बाद यूसुफ मलिक ने 4 अप्रैल 2022 को रामपुर की सीजेएम कोर्ट में अजीमनगर थाने में दर्ज मुकदमे में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद यूसुफ मलिक ने अपने अधिवक्ता नासिर सुल्तान के माध्यम से जमानत की अर्जी दाखिल की थी। अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि अप्रैल 2022 में यूसुफ मलिक की जमानत सेशन कोर्ट से मंजूर हो गई थी। लेकिन उनकी रिहाई नहीं हो पाई थी। रासुका की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर सुनवाई के सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से की गई रासुका की कार्रवाई को निरस्त करते हुए यूसुफ मलिक को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए थे। 
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कोर्ट ने इसको लेकर तल्ख टिप्पणी भी की थी। कोर्ट ने कहा था कि क्या यह रासुका का मामला है? यही कारण है कि राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप सामने आते हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद मंगलवार को रामपुर की कोर्ट से मंगलवार को ही उनकी रिहाई का परवाना जिला कारागार भेज दिया गया था। लेकिन औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगा और यूसुफ की रिहाई बुधवार की रात 11.15 बजे संभव हो पाई।

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