Rampur By-Election: 45 सालों में पहली बार आजम या उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं है प्रत्याशी
आजम खां ने चुनावी राजनीति में 1977 में कदम रखा था। पहली बार वो 1977 में चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था। उस वक्त इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा माना जाता था। इसके बाद आजम खां ने 1980 से लेकर 1993 के बीच हुए पांच विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की।
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रामपुर विधानसभा सीट के इतिहास में 45 साल के बाद ऐसा अवसर आया है जब यहां विधानसभा चुनाव में आजम खां या उनके परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में नहीं है। इस सीट पर 1977 से लेकर 2022 तक के 12 विधानसभा के चुनाव आजम खां लड़ चुके हैं। दस बार उनको जीत हासिल हुई है और दो बार हार का सामना करना पड़ा है। 2019 में आजम खां के सांसद बनने बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा चुनावी मैदान में उतरी थीं और उनको जीत हासिल हुई थी। अब आजम के करीबी आसिम राजा इस सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे।
आजम खां ने चुनावी राजनीति में 1977 में कदम रखा था। पहली बार वो 1977 में चुनाव लड़े थे। इस चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था। उस वक्त इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा माना जाता था। इसके बाद आजम खां ने 1980 से लेकर 1993 के बीच हुए पांच विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल की। 1996 का चुनाव वो कांग्रेस के अफरोज अली खां से हार गए। उस वक्त पार्टी ने उनको राज्यसभा में भेज दिया था। इसके बाद 2002 से 2022 के बीच हुए विधानसभा के पांच चुनावों में आजम खां ने लगातार जीत हासिल की।
आजम खां ने 2019 का लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की। उस वक्त वो इस सीट से विधायक थे। उनके इस्तीफे बाद पार्टी ने उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को उम्मीदवार बनाया। डॉ. फात्मा भी यह चुनाव जीत गईं। इस बीच आजम खां पर कई मुकदमे दर्ज हुए और कोर्ट से कुर्की का वारंट जारी होने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आजम के साथ कोर्ट में आत्समर्पण कर दिया था। तीनों को सीतापुर की जेल में भेज दिया गया था।
सभी मुकदमों में जमानत हो जाने के बाद पहले डॉ. फात्मा और बाद में अब्दुल्ला जेल से बाहर आए। आजम खां लगभग 27 महीने तक सीतापुर की जेल में रहे। जेल में रहते हुए ही उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। नफरती भाषण के एक मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी रद्द कर दी गई है। जिसके बाद इस सीट पर उपुचनाव हो रहा है।
आजम खां ने 2019 का लोकसभा का चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की। उस वक्त वो इस सीट से विधायक थे। उनके इस्तीफे बाद पार्टी ने उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को उम्मीदवार बनाया। डॉ. फात्मा भी यह चुनाव जीत गईं। इस बीच आजम खां पर कई मुकदमे दर्ज हुए और कोर्ट से कुर्की का वारंट जारी होने के बाद उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आजम के साथ कोर्ट में आत्समर्पण कर दिया था। तीनों को सीतापुर की जेल में भेज दिया गया था।
सभी मुकदमों में जमानत हो जाने के बाद पहले डॉ. फात्मा और बाद में अब्दुल्ला जेल से बाहर आए। आजम खां लगभग 27 महीने तक सीतापुर की जेल में रहे। जेल में रहते हुए ही उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। नफरती भाषण के एक मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी रद्द कर दी गई है। जिसके बाद इस सीट पर उपुचनाव हो रहा है।
उपचुनाव को लेकर सपा किसे प्रत्याशी बनाएगी इस बात को कयास कई दिनों से लगाए जा रहे थे। राजनीति के जानकार बता रहे थे कि आजम खां डॉ. फात्मा को उम्मीदवार बना सकते हैं। प्रत्याशी के चयन के लिए उन्होंने मंगलवार की शाम कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी। मैराथन बैठक के बाद उन्होंने रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए आसिम राजा के नाम का एलान कर दिया।
आजम खां उम्मीदों पर खरा उतरूंगा- आसिम
रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए सपा का प्रत्याशी घोषित होने के बाद आसिम राजा ने कहा कि वो आजम खां की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। आजम खां ने उनको जिस विश्वास के साथ टिकट दिया है उसको पूरा करेंगे। उन्होने कहा कि अवाम भी हमारे साथ है। लोकसभा उपचुनाव में मिली हार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि वह चुनाव कैसे हुआ था।
आजम के करीबी माने जाते हैं आसिम
सपा का टिकट हासिल करने वाले आसिम रजा की गिनती आजम खान के बेहद करीबी लोगों में होती है। शमसी बिरादरी से आने वाले आसिम राजा की अपनी बिरादरी में मजबूत पैठ है। समाजवादी पार्टी के लम्बे समय से जुड़े पूर्व में व्यापारी नेता भी रहे।