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चांद रात में होता है रहमतों का नजूल
अमर उजाला/ ब्यूरो रामपुर
Updated Wed, 06 Jul 2016 12:58 AM IST
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मस्जिद में खत्म कुरान पाक पूरा होने पर दुआ करते हाफिज।
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पांच महीनों का चांद देखना वाजिबे किफाया है। टेलीफोन, अखबार, जंतरी और अफवाह पर चांद का हो जाना साबित नहीं होता। शरीयत में चांद देखने या गवाही से ही सुबूत का एतबार है। लिहाजा चांद देखने की कोशिश की जाए।
काजी-ए- शरआ मुफ्ती सैयद शाहिद अली रजवी बताते हैं कि पांच महीनों यानी शावान, रमजान, शव्वाल, जीकादाह और जिलहिज्जा का चांद देखना वाजिबे किफाया है। तार या टेलीफोन से चांद का हो जाना साबित नहीं होता। न बाजारी अफवाह, जंतरी और अखबार चांद का कोई सुबूत है।
शरीयत में चांद देखने या गवाही से ही सुबूत का एतबार है। इसलिए लोगों को चांद देखने की कोशिश करनी चाहिए। अशूरे की रात, शब-ए- बारात, शब-ए- कद्र, ईदुल फितर और ईदुल अजहा की रात रहमतों का नजूल होता है। चांद रात में लोग अपने रब से दुआ मांगते हैं। लिहाजा अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआ कुबूल फरमाता है।
काजी-ए- शरआ मुफ्ती सैयद शाहिद अली रजवी बताते हैं कि पांच महीनों यानी शावान, रमजान, शव्वाल, जीकादाह और जिलहिज्जा का चांद देखना वाजिबे किफाया है। तार या टेलीफोन से चांद का हो जाना साबित नहीं होता। न बाजारी अफवाह, जंतरी और अखबार चांद का कोई सुबूत है।
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शरीयत में चांद देखने या गवाही से ही सुबूत का एतबार है। इसलिए लोगों को चांद देखने की कोशिश करनी चाहिए। अशूरे की रात, शब-ए- बारात, शब-ए- कद्र, ईदुल फितर और ईदुल अजहा की रात रहमतों का नजूल होता है। चांद रात में लोग अपने रब से दुआ मांगते हैं। लिहाजा अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआ कुबूल फरमाता है।
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