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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Ram Mandir: Reached Ayodhya after walking 100 kilometers, kar sevak said - now is time for celebration

Ram Mandir: 100 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे अयोध्या, कारसेवकों ने कहा- अब उत्सव का वक्त, संघर्ष लाया रंग

Sun, 14 Jan 2024 12:55 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: विमल शर्मा Updated Sun, 14 Jan 2024 12:55 PM IST
सार

राम मंदिर आंदोलन में रामपुर के कारसेवकों ने भी भाग लिया था। उन्होंने बताया कि जब वह अयोध्या जा रहे थे तब पुलिस ने उसके कुछ साथियों को पकड़ लिया था। इसके बाद वह छिपते हुए आंदोलन में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। अब राम मंदिर में 22 को होने वाले आयाेजन को लेकर वह खुश हैं।  

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Ram Mandir: Reached Ayodhya after walking 100 kilometers, kar sevak said - now is time for celebration
राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले कारसेवक - फोटो : संवाद

विस्तार

अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर हर ओर माहौल राममय नजर आ रहा है। भाजपा और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता लोगों को घर-घर अक्षत वितरण कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भव्य आयोजन के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

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ऐसे में 1992 में कारसेवा के लिए अयोध्या जाने वाले बिलासपुर के कारसेवक अपने संघर्ष को याद कर रहे हैं। कारसेवक बताते हैं कि 100 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलकर वे अयोध्या पहुंचे थे। अब उत्सव मनाने का समय आ गया है।
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1992 में मोहल्ला पंजाबी कॉलोनी निवासी कारसेवा प्रमुख प्रवीण शौरी के नेतृत्व में 12 कारसेवकों का एक जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ था। दो कार सेवकों को मिलक में गिरफ्तार कर लिया था, जबकि 10 लोग पुलिस को चकमा देकर अयोध्या से 50 किलोमीटर दूर मीरपुर कांटा गांव में पहुंचकर छुप गए थे।
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वहां 20 दिन एक घर में रुके। उस गांव में पांच सौ से अधिक कारसेवक विभिन्न जिलों के रुके थे। बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर काफी दूर ले जाकर एक स्कूल में बनी अस्थायी जेल में बंद कर दिया था। कारसेवकों का कहना है वहां से छूटकर करीब 100 किलोमीटर पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे थे।

छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में रामभक्तों का सैलाब उमड़ा था। उस दिन बिलासपुर के तमाम गांवों के कारसेवक वहां पहुंचे थे और कारसेवा की थी। कारसेवकों का कहना है कि आज जब अयोध्या में भव्य राममंदिर बनकर तैयार हो गया और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो बेहद खुशी हो रही है।

राममंदिर आंदोलन के दौरान काफी संघर्ष किया। मेरे नेतृत्व में तमाम कारसेवक 1992 में अयोध्या पहुंचे थे। आज जब राममंदिर बनकर तैयार हो गया है तो बेहद खुश हूं। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। सभी लोग अब उत्सव मनाएं। मैंने 22 जनवरी के दिन के लिए काफी तैयारी की है। पूजा-अर्चना के साथ ही भंडारा भी किया जाएगा। -प्रवीण शौरी, कारसेवक, मोहल्ला पंजाबी कॉलोनी, बिलासपुर।


रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को लेकर बेहद उत्साहित हूं। राममंदिर को लेकर बिलासपुर के तमाम लोगों ने काफी संघर्ष किया। 1990 में नगर में राम ज्योति यात्रा निकाल रहे रामभक्तों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई थीं, उसे लोग आज भी नहीं भूले हैं। अयोध्या जाकर कारसेवा का सौभाग्य मिला था। अब राममंदिर बनने से बेहद खुशी मिली है। ऐसा लग रहा है जीवन का एक बड़ा उद्देश्य पूर्ण होगा। 22 जनवरी को दिवाली मनाई जाएगी।  -डॉक्टर बीके शर्मा, कारसेवक, माटखेड़ा रोड बिलासपुर

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