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कृषि कानूनों की वापसी तक जारी रहेगा आंदोलन
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भोट (रामपुर)। कृषि कानूनों के विरोध में कोयला टोल प्लाजा पर चल रहा किसानों का बेमियादी धरना 73वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।
केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को वापस किए जाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन का बेमियादी धरना 73वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने केन्द्र सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए जमकर कोसा तथा नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया।मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब ने कहा कि आठ माह से भी अधिक समय से देश का किसान तीनों कृषि बिलों को वापस किए जाने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार है कि किसानों से वार्ता को ही तैयार नहीं है और न ही किसान विरोधी कानूनों को वापस ले रही है। सरकार द्वारा हमेशा अपनी योजनाओं का प्रचार करते हुए उससे होने वाले फायदों की जानकारी जनता को दी जाती रही है। लेकिन, आंदोलन कर रहे किसानों को व देश को कृषि बिलों से होने वाले फायदे की कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
इससे यह साबित होता है कि कृषि बिलों से किसानों को कोई फायदा नहीं है। किसान भी हार मानने वाले नहीं है और जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती किसान आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इस दौरान तहसील अध्यक्ष इरफान हसन, छिद्दा अली, सलीम, नदीम अहमद, जुनैद, दिलशाद, जाहिद अली, नाजिम अली, अब्दुल मुस्तफा, चंद्रसेन, सतनाम सिंह, महबूब आदि मौजूद रहे।
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केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को वापस किए जाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन का बेमियादी धरना 73वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने केन्द्र सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए जमकर कोसा तथा नारेबाजी कर विरोध प्रदर्शन किया।मंडल उपाध्यक्ष मोहम्मद तालिब ने कहा कि आठ माह से भी अधिक समय से देश का किसान तीनों कृषि बिलों को वापस किए जाने की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार है कि किसानों से वार्ता को ही तैयार नहीं है और न ही किसान विरोधी कानूनों को वापस ले रही है। सरकार द्वारा हमेशा अपनी योजनाओं का प्रचार करते हुए उससे होने वाले फायदों की जानकारी जनता को दी जाती रही है। लेकिन, आंदोलन कर रहे किसानों को व देश को कृषि बिलों से होने वाले फायदे की कोई जानकारी भी नहीं दी जा रही है।
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इससे यह साबित होता है कि कृषि बिलों से किसानों को कोई फायदा नहीं है। किसान भी हार मानने वाले नहीं है और जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती किसान आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इस दौरान तहसील अध्यक्ष इरफान हसन, छिद्दा अली, सलीम, नदीम अहमद, जुनैद, दिलशाद, जाहिद अली, नाजिम अली, अब्दुल मुस्तफा, चंद्रसेन, सतनाम सिंह, महबूब आदि मौजूद रहे।
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