टकराव के डर से पानी पर पहरा
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अधिकतर नलकूप खराब रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त बिजली भी नहीं मिल रही है। ऐसे में अधिकतर क्षेत्रफल की सिंचाई नहरों के भरोसे है। नहरों में उत्तराखंड के बौैर जलाशय, हरिपुरा और तुमड़िया जलाशय से पानी छोड़ा जाता है। इस वक्त जलाशयों में पानी का टोटा हो गया है। इसलिए इक्का दुक्का नहरों में ही पानी छोड़ा गया है। फसलों की सिंचाई के लिए किसान सभी नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं।
सिंचाई बंधु की बैठक में भी नहरों में पानी छोड़ जाने का मुद्दा उठाया गया था। नहर विभाग को आशंका है कि नहरों में पानी आते ही किसानों में टकराव पैदा हो जाएगा। चूंकि असरदार किसान पानी रोक देते हैं। लिहाजा सिंचाई विभाग ने नहरों पर पहरा बैठा दिया है। अधिशासी अभियंता ने सभी अवर अभियंता, सींचपाल और सींच पर्यवेक्षकों को गश्त करने के निर्देश दिए हैं।
नहरों की कटिंग करने और कमजोर किसानों का पानी रोकने वालों की भी सूची बनाने का फरमान जारी किया गया है। साथ ही पानी रोकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है। अधिशासी अभियंता (नहर) वीके अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड के पानी में 45 प्रतिशत यूपी का शेयर है। फसलों की सिंचाई के लिए इस वक्त पानी की डिमांड बढ़ गई। बौर जलाशयों में पानी का टोटा है।
ऐसी स्थिति में कम नहरों को ही पानी मिल सकेगा। अगर पानी छोड़ा गया तो किसानों में टकराव पैदा हो सकता है। इसलिए अभी से गश्त कराई जा रही है। ताकि, कमजोर और छोटे किसानों को भी फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिल सके।
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