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‘गलतियों को क्षमा करने वाला ही महावीर’
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Mon, 28 Sep 2015 11:40 PM IST
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अपने कृत्यों के लिए क्षमा याचना के साथ सोमवार को कल्याणकारी पर्यूषण पर्व का समापन किया गया। नगर में दो जैन मंदिरों में चल रहे पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन क्षमा वाणी महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें क्षमा के महत्व को समझाते हुए भूल वश की गई गलतियों के लिए क्षमा याचना कराई गई।
गलतियों को क्षमा करने वाली ही महावीर है। फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन सांध्य बेला में किया गया। संचालन जोड़ी प्रमोद कुमार जैन और अंजू जैन रहे। रविवार तक जिन धर्मों के पालन के लिए प्रेरित किया गया उनके सार को समझाते हुए क्षमा को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
सुनीता जैन और पदमा दीदी ने कहा कि पर्यूषण पर्व में जैन संत व विद्वानों की ओर से पर्यूषण पर्व की दशधर्मी शिक्षा के अनुसरण के लिए प्रेरित किया जाता है। मानव की सोई हुई अंत: चेतना को जागृत करने, आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार, सामाजिक सद्भावना एवं सर्वधर्म के सम्भाव के कथन को बल प्रदान करने को ही पर्यूषण पर्व का आयोजन किया जाता है।
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सोमवार को हुए क्षमावाणी महोत्सव में क्षमा मांगने वाले को वीर और क्षमा करने वाले महावीर बताते हुए क्षमा के महत्व को समझाया गया। मंगलाचरण दीक्षा जैन और भजन प्रीति जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। क्षमावाणी महोत्सव की अध्यक्षता टीएमयू के चांसलर सुरेश चंद्र जैन ने की और मुख्य अतिथि के रूप में पवन कुमार जैन मौजूद रहे।
वहीं, सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के समापन पर क्षमा वाणी का आयोजन किया गया। इसमें मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने क्षमा मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगने से जहां मनुष्य अपनी गलती का प्रायश्चित करता है।
क्षमा करने वाला भी जैन धर्म का अनुपालन करता है। उन्होंने कहा कि क्षमा से बड़ा कुछ नहीं होता। इस दौरान संजय जैन, डा.शीलू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी आदि रहे।
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गलतियों को क्षमा करने वाली ही महावीर है। फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन सांध्य बेला में किया गया। संचालन जोड़ी प्रमोद कुमार जैन और अंजू जैन रहे। रविवार तक जिन धर्मों के पालन के लिए प्रेरित किया गया उनके सार को समझाते हुए क्षमा को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
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सुनीता जैन और पदमा दीदी ने कहा कि पर्यूषण पर्व में जैन संत व विद्वानों की ओर से पर्यूषण पर्व की दशधर्मी शिक्षा के अनुसरण के लिए प्रेरित किया जाता है। मानव की सोई हुई अंत: चेतना को जागृत करने, आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार, सामाजिक सद्भावना एवं सर्वधर्म के सम्भाव के कथन को बल प्रदान करने को ही पर्यूषण पर्व का आयोजन किया जाता है।
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सोमवार को हुए क्षमावाणी महोत्सव में क्षमा मांगने वाले को वीर और क्षमा करने वाले महावीर बताते हुए क्षमा के महत्व को समझाया गया। मंगलाचरण दीक्षा जैन और भजन प्रीति जैन द्वारा प्रस्तुत किए गए। क्षमावाणी महोत्सव की अध्यक्षता टीएमयू के चांसलर सुरेश चंद्र जैन ने की और मुख्य अतिथि के रूप में पवन कुमार जैन मौजूद रहे।
वहीं, सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के समापन पर क्षमा वाणी का आयोजन किया गया। इसमें मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने क्षमा मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगने से जहां मनुष्य अपनी गलती का प्रायश्चित करता है।
क्षमा करने वाला भी जैन धर्म का अनुपालन करता है। उन्होंने कहा कि क्षमा से बड़ा कुछ नहीं होता। इस दौरान संजय जैन, डा.शीलू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी आदि रहे।