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95 लाख पाइप लाइन के खर्च ने ऑक्सीजन प्लांट की 72 लाख की मशीन को बना दिया शोपीस
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रामपुर। जिला महिला अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना के लिए मंजूरी मिली थी। इसके बाद 72 लाख रुपये से ऑक्सीजन प्लांट की मशीन भी आ गई लेकिन, 95 लाख से पाइप लाइन का काम न होने के कारण सात माह से ये मशीन शोपीस बनी हुई है। इस कारण अभी तक महिला अस्पताल के वार्डों में ऑक्सीजन सिलिंडरों से ही ऑक्सीजन की आपूर्ति हो रही है। ऐसा भी नहीं कि शासन को इसकी जानकारी न हो। स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि पाइपलाइन का काम कराने के लिए 95 लाख रुपये के बजट की मांग को लेकर चार बार पत्र भेजा चुका है।
कोरोना की दूसरी लहर में बेड और ऑक्सीजन की सबसे अधिक किल्लत सामने आई थी। ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए तो मारामारी मच गई थी। ऐसे में जिले में तीसरी लहर से निपटने के लिए ऑक्सीजन उपलब्धता के संसाधन बढ़ाने पर काम हुआ। इसके तहत जिला महिला अस्पताल में पांच सौ एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता के एक ऑक्सीजन प्लांट को मंजूरी मिली। मंजूरी के बाद 17 नवंबर 21 को 72 लाख रुपये ऑक्सीजन प्लांट की मशीन भी आ गई लेकिन, सात माह का समय बीतने के बाद भी इस ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन कर वार्डों में बेड तक ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसकी वजह ऑक्सीजन उत्पादन कर इसे वार्ड में बेड तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन का इंस्टालेशन का काम अभी तक नहीं हुआ है।
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कोरोना की दूसरी लहर में बेड और ऑक्सीजन की सबसे अधिक किल्लत सामने आई थी। ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए तो मारामारी मच गई थी। ऐसे में जिले में तीसरी लहर से निपटने के लिए ऑक्सीजन उपलब्धता के संसाधन बढ़ाने पर काम हुआ। इसके तहत जिला महिला अस्पताल में पांच सौ एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता के एक ऑक्सीजन प्लांट को मंजूरी मिली। मंजूरी के बाद 17 नवंबर 21 को 72 लाख रुपये ऑक्सीजन प्लांट की मशीन भी आ गई लेकिन, सात माह का समय बीतने के बाद भी इस ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन का उत्पादन कर वार्डों में बेड तक ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसकी वजह ऑक्सीजन उत्पादन कर इसे वार्ड में बेड तक पहुंचाने के लिए पाइप लाइन का इंस्टालेशन का काम अभी तक नहीं हुआ है।
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